संगमा से उनकी ही पार्टी ने किया किनारा लकवाग्रस्त महिला ने रोबोटिक बांह से पी कॉफी
ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए योजना तैयार: अमेरिका
ब्लैकहोल की तरह अमेरिकी सहायता निगल रहा है पाक
संगमा होंगे राष्ट्रपति पद के हमारे उम्मीदवार: पटनायक
तीस हजारी होगा सोना: एसोचैम
सेंसेक्स में 40 अंक की मामूली बढ़त
बिजली उत्पादन के लिए 13,000 करोड़ देगा विश्व बैंक
'मैंने नहीं पी शराब, गाली के जवाब में दी गाली' जगन रेड्डी की तीन कंपनियां जब्त कर सकती है CBI
दूसरे मुल्कों में कुछ कायदे-कानून हैं। पकड़े जाने पर सजा है। अपने यहां कोई स्पष्ट कानून नहीं है। अधिक से अधिक दोषी को सस्पेंड किया जाता है। आगे पढे
संसद अपनी राय रखने और उसका विरोध करने का मंच है लेकिन बाधा डालने का नहीं। आगे पढे
हमारे सांसद चाहते हैं कि बच्चों पर अच्छे संस्कार पड़ें और वे अच्छी चीजें सीखें। इसी उद्देश्य से पाठय़-पुस्तकों से वे कार्टून हटा दिए गए हैं, जो नेताओं का मजाक बनाते हैं। आगे पढे
उदासी गहराती जा रही है। कल शाम जब से वह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से नाटक देखकर लौटे हैं, परेशान हैं। उन्होंने खुद एक रंगकर्मी बनना तय किया था, लेकिन बन गए एक आर्किटेक्ट। आगे पढे
जब हम स्त्रियों, बच्चियों, बेटियों, लड़कियों की बात करते हैं, तो वैसे नहीं करते, जैसे किसी सामान्य मानव की करते हैं, जिसके अधिकार हैं, दुख हैं, सुख हैं, इच्छाएं हैं, आगे पढे
बांध के विरोध में खड़े लोग पर्यावरण के मुद्दे पर चिंतित तो हैं, पर आज तक ऊर्जा के ठोस विकल्प के रूप में सामने कुछ नहीं रख पाए। आगे पढे
कृषि उपज की भंडारण व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, लेकिन नई व्यवस्था तैयार करना आसान भी नहीं। आगे पढे
‘भाई मियां, घाव चाहे सुई की नोक से लगे या खंजर से। जहरीला हो जाए, तो जान पर आ बनती है। यही हाल भ्रष्टाचार का है। आगे पढे
वह तमतमाए हुए थे। इंक्रीमेंट उम्मीद से काफी कम मिला। बॉस के आते ही वह उनके केबिन में पहुंचे और अपनी भड़ास निकाल दी। आगे पढे
मेरी तरफ से सौवें जन्मदिन की मुबारकबाद कबूल करो। हां, थोड़ी देर हो गई है। बात यह है मंटो, मैं तुम्हें मुबारकबाद भेजने वाला नहीं था। आगे पढे
हाल के वर्षो में सामने आए अनेक घोटालों ने हमारी नियामक संस्थाओं की नाकामयाबी को पूरे देश के सामने उजागर किया है। आगे पढे
कोर्ट ने कह दिया है, काली फिल्म नहीं चलेगी। पुलिस भी एक्शन में आ गई है, काली फिल्म नहीं चलेगी। पूरी सख्ती है, किसी भी तरह की कोई भी रियायत नहीं। आगे पढे
कुछ ही दिनों के भीतर गुड़गांव में 12 लोगों ने अपनी जान दे दी। हाल के कुछ वर्षो में, खासकर महानगरों में आत्महत्याओं के जो मामले सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। आगे पढे
ध्यान बहुत तरह से किया जा सकता है। ध्यान एक घटना है, यह पहली बात है। दूसरी बात, यह सहज है। ध्यान के लिए मुख्य है सहजता। आगे पढे
तीन मई को भारतीय सिनेमा अपने सौवें बरस में दाखिल हो गया। हिंदी के कथा संसार की उम्र भी लगभग इसके बराबर है— शायद कुछ बरस ज्यादा, लेकिन दोनों समकालीन कहे जा सकते हैं। आगे पढे
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