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लड़की की किट पहनकर गोलकीपर बने थे भरत छेत्री
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:31-01-12 10:00 PM
ओलंपिक क्वालीफायर के लिए भारतीय हाकी टीम के कप्तान चुने गए गोलकीपर भरत छेत्री ने दिलचस्प खुलासा किया है कि वह पहली बार लड़की की किट पहनकर गोलकीपर बने थे।
छेत्री ने यहां द एनर्जी एंड रिसरेसेज इंस्टीटूट (टेरी) द्वारा आयोजित चौथी युवा मीट में अपने जीवन के कुछ दिलचस्प पहलुओं का खुलासा करते हुए कहा कि वह पहली बार लड़की की किट पहनकर गोलकीपर बने थे। भारतीय कप्तान ने युवा मीट में उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि गोलकीपिंग कैसे होती है। मुझे बस इतना कहा गया था कि गोलपोस्ट में खड़े होकर सामने से आती गेंदों को रोकना है। मैंने यह काम बखूबी किया और उसके बाद से तो मैं गोलकीपर ही बन गया।
छेत्री ने कहा कि मेरे कोच ने मुझसे कहा था कि घर से पैसे लेकर आओ ताकि तुम्हारी किट वगैरह खरीदी जा सके। उसके बाद मैं घर गया और माता-पिता से पैसे मांगे जो उन्होंने कहीं से इंतजाम कर मुझे दिए। इसके बाद मैं पटना चला आया, इसलिए मैं मानता हूं कि आपके पीछे आपके माता-पिता का हाथ होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मैंने फिर आर्मी ब्वायज स्पोर्ट्स कंपनी का हास्टल ज्वाइन किया। मैं फिर बेंगलूर गया और कर्नाटक की टीम की तरफ से खेलने लगा। मेरा एक ही लक्ष्य था कि मुझे देश के लिए खेलना है। उस समय मुझे काफी सफर करना पड़ता था और मेरे पास ज्यादा पैसे भी नहीं होते थे। मेरे लिए वह समय मुश्किल भरा था।
छेत्री ने कहा कि मैंने 2001 में पहली बार जूनियर नेशनल खेला जिससे मुझे आत्मविश्वास आया कि अगर आपमें आत्मविश्वास हो तो आप अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हो। भारतीय कप्तान ने युवाओं को अपनी सलाह में कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और जब कुछ गिरावट हो तो उसे चुनौतियों के रूप में देखना चाहिए। आप निश्चित ही उस स्थिति से बाहर निकल आओगे।
उन्होंने साथ ही कहा कि भारतीय हाकी में पिछले दो-तीन वर्षों में काफी बदलाव आया है और खिलाड़ियों को काफी सुविधाएं मिलने लगी हैं, लेकिन वह मैच पैसे के लिए नहीं बल्कि देश के लिए खेलते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे 18 फरवरी से नेशनल स्टेडियम में होने वाले ओलंपिक क्वालीफायर को देखने आएं और भारतीय टीम का मनोबल बढ़ाएं।
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