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तीन रुपये महंगा हुआ पेट्रोल
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:15-09-11 08:00 PM
Last Updated:16-09-11 01:31 AM
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पेट्रोल-डीजल की खुदरा बिक्री करने वाली सरकारी कंपनियों ने पेट्रोल कीमतों में 3.14 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। कच्चे तेल की आयातित लागत बढ़ने की वजह से कंपनियों ने यह कदम उठाया है।

इन कंपनियों में से एक के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में गुरुवार मध्यरात्रि से पेट्रोल का दाम 3.14 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 66.84 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। अभी तक पेट्रोल का दाम 63.70 रुपये प्रति लीटर था, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 103 डालर प्रति बैरल के अनुरूप था।

अधिकारी ने बताया कि आज की तारीख में कच्चा तेल 110-111 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इसके साथ ही रुपये की विनिमय दर डालर की तुलना में कमजोर पड़कर दो साल के निचले स्तर के आस पास चली गयी है।

यह चार माह में पेट्रोल कीमतों में दूसरी वृद्धि है। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। अधिकारी ने कहा कि हमें पेट्रोल की बिक्री पर प्रति लीटर 2.61 रुपये या प्रतिदिन 15 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वैट या बिक्रीकर को जोड़ने के बाद कीमतों को अंतरराष्ट्रीय भाव के अनुरूप लाने के लिए 3.14 रुपये की वृद्धि की जरूरत थी।

वैट और अन्य स्थानीय करों की वजह से विभिन्न शहरों में पेट्रोल का दाम अलग-अलग होता है। पिछले साल जून में सरकार ने पेट्रोल को नियंत्रणमुक्त कर दिया था। पर महंगाई के अनुरूप पेट्रोल कीमतों में इजाफा नहीं किया जा सका, क्योंकि मुद्रास्फीति की ऊंची दर को देखते हुए कंपनियों के सामने पेट्रोलियम मंत्रालय से सलाह लेने की मजबूरी आ गयी।

आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को इस वित्त वर्ष में पेट्रोल की आयातित मूल्य से कम की बिक्री पर 2,450 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। पेट्रोल के अलावा इन तीनों कंपनियों को डीजल, एलपीजी तथा मिट्टी के तेल की लागत से कम मूल्य पर बिक्री से प्रतिदिन 263 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। ये कंपनियां डीजल 6.05 रुपये प्रति लीटर के घाटे पर बेच रही हैं, जबकि केरोसिन पर उन्हें प्रति लीटर 23.25 रुपये का नुकसान सहना पड़ रहा है। एलपीजी पर उन्हें प्रति सिलेंडर 267 रुपये का नुकसान हो रहा है।

अधिकारी ने कहा कि सितंबर, 2009 के बाद बुधवार को रुपया गिरकर 48 प्रति डॉलर पर आ गया। रुपये में प्रत्येक एक रुपये की कमजोरी से कंपनियों को सालाना घाटा 9,000 करोड़ रुपये बढ़ता है।

 
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