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टीम मुद्दे सुलझाने के लिये हस्तक्षेप करे BCCI: कपिल
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:22-02-12 06:36 PM
भारतीय क्रिकेट टीम में मतभेदों की रिपोर्टों के बीच पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने बुधवार को मांग की कि बीसीसीआई को खिलाड़ियों के बीच नजरिये में अंतर के मुद्दे को निपटाने के लिये हस्तक्षेप करना चाहिए। केवल तीन शीर्ष क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर के लिये इस्तेमाल की गयी विवादास्पद रोटेशन प्रणाली से टीम के भीतर मतभेद की अटकलें लगायी जा रही हैं।
कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने इस आधार पर टीम में तीन शीर्ष बल्लेबाजों को रोटेट करने की प्रणाली का बचाव किया था कि वे क्षेत्ररक्षण के दौरान धीमे हैं, लेकिन वीरेंद्र सहवाग ने यह कहकर इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया था कि सीनियर खिलाड़ियों को कभी नहीं बताया गया कि क्षेत्ररक्षण इसका कारण था। गंभीर ने भी मैच जल्दी खत्म नहीं करने और इसे अंतिम ओवर तक ले जाने के लिये अपने कप्तान की आलोचना की थी।
कपिल ने कहा कि वह इसे टीम के अंदर मतभेद करार नहीं देंगे बल्कि इसे नजरिये में अंतर कहेंगे। उन्होंने यहां आस्ट्रेलियाई उच्चायोग में युवाओं के लिये आयोजित क्रिकेट क्लीनिक के दौरान कहा कि कप्तान धौनी की राय अलग होगी और आम तौर पर उसके नजरिये का सम्मान किया जाता है। मुझे लगता है कि टीम और देश की बेहतरी के लिये बीसीसीआई को आगे आकर खिलाड़ियों के साथ इस मामले को सुलझाना चाहिए।
कपिल ने कहा कि मैं इसे टीम के अंदर मतभेद नहीं कहूंगा बल्कि इसे नजरिये में अंतर कहना चाहूंगा। इस मुद्दे पर टिप्पणी करना काफी मुश्किल है क्योंकि हम नहीं जानते कि आस्ट्रेलिया में असल में क्या हुआ है। यह पूछने पर कि सीनियर खिलाड़ी जैसे सहवाग को सलामी बल्लेबाजों के लिये अपनायी जा रही रोटेशन प्रणाली का कारण क्यों नहीं बताया गया तो कपिल ने कहा कि यहां तक कि मां-बाप का नजरिया भी कई बार अलग होता है, इसलिये हमें इसे तूल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को समझना होगा कि देश का सम्मान उनसे जुड़ा है। अगर कोई गलतफहमी है तो इसका निपटारा किया जाना चाहिए। वे देश के लिये खेल रहे हैं।
कपिल ने कहा कि उनकी राय में सचिन तेंदुलकर को तभी एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लेना चाहिए था जब भारत ने पिछले साल विश्व कप जीता था, लेकिन अलविदा कहने का फैसला खिलाड़ी को ही करना है। उन्होंने कहा कि मैं सचिन तेंदुलकर को संन्यास लेने की सलाह देने वाला कोई नहीं हूं। लेकिन मेरी राय में उसे तभी वनडे से अलविदा कह देना चाहिए था जब भारत ने विश्व कप जीता था, तब टीम शीर्ष पर थी। लेकिन यह मेरी राय है। मुझे लगता है कि मैं अपनी राय रख सकता हूं, लेकिन फैसला उसी को करना है।
कपिल ने कहा कि तेंदुलकर अपने क्रिकेट का लुत्फ उठा रहा है और उसने टीम और देश के लिये काफी उपलब्धियां हासिल की हैं। हम लिटिल मास्टर से और क्या उम्मीद कर सकते हैं। वर्ष 1983 विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिल ने कहा, लेकिन अगर मैं तेंदुलकर की जगह होता तो मैं भारत के विश्व कप जीतने के बाद तभी यह कह देता कि मैंने टीम और देश के लिये क्रिकेट में काफी कुछ हासिल कर लिया है और अब अन्य खिलाड़ियों के टीम में लाने का समय आ गया है।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने आस्ट्रेलिया में भारतीय टीम के टेस्ट में निराशाजनक प्रदर्शन की जांच करने से इंकार कर दिया है, लेकिन कपिल ने कहा कि बीसीसीआई और चयनकर्ताओं को पता करना होगा कि टीम में क्या गलत हुआ था। उन्होंने कहा कि हमें खिलाड़ियों को विश्व चैम्पियन की तरह खेलने और मैच जीतने के लिये प्रेरित करना चाहिए। वे विश्व चैम्पियन हैं। लेकिन आस्ट्रेलिया से लौटने के बाद बीसीसीआई और चयनकर्ताओं को साथ बैठकर पता करना चाहिए कि टीम के साथ क्या गलत हुआ।
यह पूछने पर कि क्या आस्ट्रेलिया दौरे के बाद सीनियर खिलाड़ियों को टेस्ट टीम से बाहर कर देना चाहिए तो कपिल ने कहा कि इस पर फैसला करना चयनकर्ताओं का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस पर फैसला चयनकर्ताओं को करना है। मुझे लगता है कि सही यही होगा कि जब आस्ट्रेलिया दौरा खत्म हो जाये तो बीसीसीआई और चयनकर्ता बैठकर भारतीय क्रिकेट के लिये भविष्य की रणनीति बनायें। अगर सीनियर खिलाड़ी इस रणनीति का हिस्सा हैं तो ठीक है। वर्ना खिलाड़ियों को यह बात समझनी होगी।
यह पूछे जाने पर कि क्या चयनकर्ताओं को अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे भारतीय क्रिकेटरों को उसी तरह ही बाहर कर देना चाहिए जैसा आस्ट्रेलिया ने वनडे टीम से रिकी पोंटिंग जैसे खिलाड़ी को बाहर करके किया तो कपिल ने कहा कि अलग-अलग देशों में अलग प्रणाली काम करती है। उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलियाई अलग नियम अपनाते हैं। वे प्रदर्शन या खराब प्रदर्शन पर ही अडिग हैं। लेकिन भारत में यह चीज कारगर नहीं होती। अलग देशों में अलग प्रणाली काम करती है। भारत आस्ट्रेलिया जैसे नियम नहीं अपना सकता।
पूर्व आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज डीन जोंस को लगता है कि सचिन तेंदुलकर को जल्द ही एक दिवसीय प्रारूप से संन्यास ले लेना चाहिए। जोंस ने कहा कि सचिन के लिये सभी प्रारूपों में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना मुश्किल है। जल्द ही उसे एक दिवसीय प्रारूप से संन्यास ले लेना चाहिए। आस्ट्रेलिया में भारतीय टीम के अंदर मतभेद की बात पूछने पर जोंस ने कहा कि जब टीम अच्छा नहीं करती तो छोटी बातों को भी तूल दे दिया जाता है। भारतीय टीम यही हो रहा है।
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