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हर रोज जान जोखिम में डालते हैं केरल के मछुआरे
तिरुवनंतपुरम, एजेंसी
First Published:20-02-12 02:28 PM
केरल तट से लगे समुद्र में इटली के तेलवाहक पोत पर सवार सुरक्षाकर्मियों द्वारा दो भारतीय मछुआरों की गोली मारकर हत्या किए जाने की खबर पर मचे होहल्ले के बाद घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को भले ही गिरफ्तार कर लिया गया हो, लेकिन समुद्र में आजीविका कमाने वालों को हर रोज ऐसे खतरों से दो-दो हाथ करना पड़ता है।
विल्फ्रेड गोमेज (62) नामक एक मछुआरे ने कहा कि यह हमारा काम है, ऐसे खतरे सदियों से बने हुए हैं। इन खतरों पर आज जो होहल्ला हो रहा है, वह थोड़े ही दिनों के लिए है। कुछ ही दिनों में मीडिया गोलीबारी की इस घटना को भूल जाएगा।
गोमेज बुधवार की उस घटना का जिक्र कर रहे थे, जिसमें अलप्पुझा से लगे अरब सागर में इटली के तेलवाहक पोत पर सवार चालक दल के सदस्यों ने दो भारतीय मछुआरों को समुद्री डाकू समझकर गोली मार दी थी, और दोनों की मौत हो गई थी। इसमें से एक मछुआरा केरल से और एक तमिलनाडु से था।
गोमेज ने कहा कि यह हमारा कठिन परिश्रम है, समुद्री खाद्य पदार्थो के निर्यात के जरिए हम देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करते हैं। लेकिन हमारी समस्याओं की ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। हम इस पेशे के अलावा दूसरा कोई काम नहीं जानते। लिहाजा समुद्र में चाहे जो भी खतरे हों, हमारे पास इसका सामना करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
केरल का मत्स्य उद्योग, अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राष्ट्रीय समुद्री मत्स्य उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत के आसपास है। जहां गैर समुद्री मत्स्य पालन में 1,00,000 से अधिक लोग लगे हुए हैं, वहीं समुद्री मछली पकड़ने के काम में लगभग 3,50,000 मछुआरे लगे हुए हैं। केरल में समुद्री तट 590 किलोमीटर लम्बा है, और वहां राज्य में मछली पकड़ने के नौ बंदरगाह और मछली उतारने के 17 केंद्र हैं।
वर्ष 2010-11 के दौरान देश से समुद्री उत्पाद निर्यात के इतिहास में पहली बार निर्यात से होने वाली आमदनी 2.8 अरब डॉलर का आकड़ा पार कर गई। इस बार निर्यात की मात्रा भी सारे पिछले आकड़े पार कर गई है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) समर्थित, राज्य के मछुआरों का संगठन, मत्स्य थोझिलाली युनियन की राज्य समिति के सदस्य सी. पॉयस ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर मचा यह होहल्ला कोई मायने नहीं रखता। उन्होंने कहा कि यह मामला अंतर्राष्ट्रीय जल से सम्बंधित तकनीकी तथ्यों के कारण हो सकता है कि अदालत में टिक ही न पाए।
पॉयस ने कहा कि केंद्र सरकार को पहला काम यह करना चाहिए कि मौजूदा मत्स्य पालन अधिनियम समाप्त कर दिया जाए, जिसे ब्रिटिश युग में 1926 में बनाया गया था। इस अधिनियम के तहत अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र मात्र 24 मील के बाद ही शुरू हो जाता है। इसके ठीक विपरीत अमेरिका और जापान जैसे अन्य देशों के समुद्री क्षेत्र 300 मील लम्बे हैं।
पॉयस ने कहा कि इसलिए यह मामला हो सकता है अदालत में कहीं का न रह जाए, और जुर्म करने वाले छूट जाएं, क्योंकि यह मामला अंतर्राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र के उल्लंघन से सम्बंधित है।
लेकिन, जानकारी के मुताबिक गोलीबारी की यह घटना अलप्पुझा तट से समुद्र में लगभग 14 मील की दूरी पर घटी थी।
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