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140 साल पहले भेजा गया था भारत से टेलीग्राफिक संदेश
पोर्थकुनर (इंग्लैंड), एजेंसी
First Published:21-02-12 03:41 PM
Last Updated:21-02-12 04:14 PM
हाल ही में खोजे गए ऐतिहासिक दस्तावेजों से पता चला है कि भारत और ब्रिटेन के बीच 23 जून 1870 को पहली बार टेलीग्राफिक संदेश भेजा गया था और हजारों किलोमीटर तक समुद्र के नीचे बिछायी गयी केबल के जरिए ही यह करिश्मा संभव हो पाया था।
इस टेलीग्राफिक संपर्क का कमाल यह हुआ कि दोनों देशों के बीच संदेशों के आदान प्रदान में लगने वाला समय महीनों के बजाय मिनटों में सिमट गया।
आज भी शायद ही किसी को मालूम हो कि दक्षिण पश्चिम लंदन से 506 किलोमीटर दूर अटलांटिक तट पर कोर्नवैल में पोर्थकुनर घाटी ही वह जगह थी जहां इस संपर्क क्रांति की शुरूआत हुई । यहीं से ब्रिटेन और उसके पूर्व उपनिवेशों के बीच संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
संग्रहालय के अधिकारियों ने बताया कि पोर्थकुनर 1870 से 1970 के बीच अंतरराष्ट्रीय केबल संवाद का मुख्य केन्द्र था। यहां 1993 तक भी संचार उद्योग के लिए प्रशिक्षण कालेज कार्यरत था। अब यहां स्थित संग्रहालय में दुर्लभ उपकरण, टेलीग्राफ के इतिहास का ब्यौरा और अन्य दस्तावेजों को संभाल कर रखा गया है।
इस टेलीग्राफिक संपर्क का कमाल यह हुआ कि दोनों देशों के बीच संदेशों के आदान प्रदान में लगने वाला समय महीनों के बजाय मिनटों में सिमट गया।
आज भी शायद ही किसी को मालूम हो कि दक्षिण पश्चिम लंदन से 506 किलोमीटर दूर अटलांटिक तट पर कोर्नवैल में पोर्थकुनर घाटी ही वह जगह थी जहां इस संपर्क क्रांति की शुरूआत हुई । यहीं से ब्रिटेन और उसके पूर्व उपनिवेशों के बीच संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
संग्रहालय के अधिकारियों ने बताया कि पोर्थकुनर 1870 से 1970 के बीच अंतरराष्ट्रीय केबल संवाद का मुख्य केन्द्र था। यहां 1993 तक भी संचार उद्योग के लिए प्रशिक्षण कालेज कार्यरत था। अब यहां स्थित संग्रहालय में दुर्लभ उपकरण, टेलीग्राफ के इतिहास का ब्यौरा और अन्य दस्तावेजों को संभाल कर रखा गया है।
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