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कुछ लोग देश को आगे बढ़ता नहीं देखना चाहते
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:17-08-11 11:19 AM
Last Updated:17-08-11 01:59 PM
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अन्ना हजारे मुद्दे पर लोकसभा में बोलते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग देश को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते। उन्होंने कहा कि अन्ना के अभियान का तरीका ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि कानून बनाना संसद का काम है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र का कोई विकल्प नहीं है और उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर है। उन्होंने कहा कि बातचीत के रास्ते खुले हैं।

इससे पहले अन्ना हजारे को गिरफ्तार किए जाने के बाद से लगातार प्रधानमंत्री के बयान पर अड़े विपक्ष की बात मानते हुए मनमोहन सिंह ने बुधवार सुबह लोकसभा में बयान दिया। इस बीच विपक्ष ने लोकसभा में हंगामा किया। एक बार फिर प्रधानमंत्री ने भी वही रटा रटाया बयान दिया जिसे दिल्ली पुलिस मंगलवार 16 अगस्त की सुबह से दे रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अन्ना के अनशन से शांति व्यवस्था भंग हो सकती थी, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।

प्रधानमंत्री ने अन्ना की गिरफ्तारी पर अफसोस जताया। उन्होंने बताया कि लोकपाल बिल स्टेंडिंग कमेटी के पास है। लेकिन अन्ना अपने बिल को लागू करने पर अड़े हुए हैं। गिरफ्तारी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अन्ना की टीम ने हलफनामा देने से इनकार कर दिया था। मनमोहन सिंह ने बताया कि पुलिस ने अन्ना के अनशन के लिए शर्तें लगाई थी, अनशन के आयोजकों ने 6 शर्तें नहीं मानी।

उन्होंने बताया कि 16 अगस्त को 2600 लोग हिरासत में लिए गए थे। प्रधानमंत्री ने बताया कि पुलिस के मुताबिक अन्ना कानून तोड़ने पर आमादा थे। उन्होंने बताया कि सारी कार्रवाई दिल्ली पुलिस की थी और पुलिस ने कल सारे लोगों को रिहा भी कर दिया था।

प्रधानमंत्री ने अन्ना हजारे पर आरोप लगाया कि वह कानून बनाने के संसद के विशेषाधिकार पर सवाल उठा रहे हैं और उन्होंने अपने जन लोकपाल विधेयक को संसद पर थोपने का जो रास्ता अख्तियार किया है, वह पूरी तरह गलत है और संसदीय लोकतंत्र को उसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

संसद के दोनों सदनों में प्रधानमंत्री ने अन्ना हजारे प्रकरण पर बुधवार को दिए बयान में कहा कि हमारी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के नागरिकों के अधिकार को पूरी तरह स्वीकार करती है। लेकिन जो लोग इस बात में विश्वास रखते हैं कि केवल और केवल उन्हीं की आवाज एक अरब 20 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करती है तो यह उनकी सोच पर सवाल खड़ा करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इस बात पर जोर देना चाहती है कि राष्ट्र के सामने प्रश्न यह नहीं है कि लोकपाल विधेयक आवश्यक या वांछित है या नहीं। सदन में हम सभी इस बात से सहमत हैं कि लोकपाल विधेयक जल्द से जल्द पारित होना चाहिए। (लेकिन) सवाल यह है कि कानून का मसौदा कौन तैयार करेगा और कानून कौन बनाएगा।

हजारे के रवैये को आड़े हाथ लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि समय से स्थापित परंपरा यह है कि कार्यकारिणी विधेयक का मसौदा बनाकर संसद के समक्ष पेश करती है और संसद उस पर चर्चा करके, अगर आवश्यक हो तो संशोधनों के साथ उसे मंजूरी देती है।

उन्होंने कहा, हालांकि मुझे ऐसे किसी संवैधानिक दर्शन या सिद्धांत की जानकारी नहीं है जो कानून बनाने के संसद के इस विशेषाधिकार पर सवाल उठाने की अनुमति दे।

लोकपाल का कानून बनाने की प्रक्रिया में सरकार इस स्थापित सिद्धांत पर पूरी तरह कायम है। जहां तक मैं समझ पा रहा हूं, अन्ना हजारे इन सिद्धांतों पर सवाल उठा रहे हैं और संसद पर जन लोकपाल विधेयक थोपने के अधिकार का दावा कर रहे हैं।

अपने इस कड़े बयान में मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें (हजारे पक्ष) संसद के निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपना वह काम करने देना चाहिए, जिसके लिए उन्हें चुना गया है।

 

 
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टिप्पणियाँ
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टिप्पणियॉ पढ़े(18)
हमें चोरो से १००% आजादी चाहिए, चाहे वो गोरा हो या कला , चाहे वो जिला में हो या डेल्ही हमें आजाद करो नहीं तो हम तुम्हे माफ़ नहीं करेगे
By SAROJ MISHRA (24th-August-2011 04:44:PM)
पार्लियामेंट में जो भी कानों बनाए जाते हैं वो लोकतंत्र की sahooliyat ke लिए जो की जनमानस के हितों को ध्यान में रख के बनाए जाने चाहिए और जन लोकपाल समिति के द्वारा उठाए गए सभी मुद्दे जनहित की भलाई में सहयोग करते हैं
By randy (24th-August-2011 10:40:AM)
आपको ही तरीकों का ज्ञान होता तो ना तो आपके शासनतंत्र में इतना तेजी से भ्रष्टाचार पनपता और भ्रष्टाचार की रोकथाम करना भी आपके मुँह से अन्ना के अभियान का तरीके की आलोचना अच्छी नहीं
By Shyam (17th-August-2011 03:27:PM)
अरे सर, ये तो बताइए की आपने कह तो दिया है की कानून बनाने का काम संसद और उसके सदस्य करते है लेकिन जब आपकी संसद ही भ्रष्ट है तो, वो तो कानून अपने हक़ में ही बनायेंगे ना ? और कृपया करके आप उन भ्रष्ट नेताओ के लीडर बनने की कोशिश ना करे क्योकि आप जेसे शांतिप्रिय और ओजेस्वी व्यक्तित्व को ये सब शोभा नहीं हम सब ये भी जानते है की आप को मजबूरन ही लोकतंत्र के विरुद्ध जाना पड़ रहा पर कम से कम हमारे इस देश के भविष्य के बारे में भी तो सोचिये जिसमे भ्रस्टाचार इस कदर विराजमान है की आने वाले कुछ वर्षो में जनता अपने काम के लिए भ्रष्ट नेताओ की जेबे भरने में असमर्ध चोरी और लूटमार करने लगे जैसा की अभी भी हो रहा
By Vikas Goswami (17th-August-2011 03:19:PM)
Sabko malum Kitna vikash ho rha Desh me loot kharot machi hai vikas kya khak
By Dhananjay singh (17th-August-2011 02:24:PM)
HAMARE NETAO KO SIRF BRASTACHAR KARNA HI PATA HAI INSE HUM AUR KUCH UMMID NAHI KAR THODI SHARAM BAKI HO TO HAMARE PM KUCH KARENGE NAHI TO INKA BHI HAT BRASHT HAI AISA HUM LOGO KO MAJBURAN MANANA PADEGA
By GOVIND (17th-August-2011 02:18:PM)
मुझे ये सोच कर हैरानी हो रही है की जो काम आज अन्ना हजारे जी कर रहे वो तो सरकार का है आखिर सरकार की भ्रस्ताचार जैसे सम्वेदनशील मुद्दे पर हजारे जी के साथ sanyukt सहमती क्यूँ नहीं बन रही है हमारी सरकार मैं इतने बड़े बड़े नेता है तथा स्वयं हमारे प्रधान मंत्री जी भीबुद्धिजीवी हैं, मुझे तो यह लगता है की सरकार को ये खुद ही नहीं पता की यो चाहती क्या है कभी श्री प्रधान मंत्री जी कहते हैं की हम भ्रस्ताचार ख़तम करना चाहते है और स्विस बैंकों मैं जमा पैसा भारत वापस लाना चाहते है कभी वो बाबा रामदेव और अन्ना जी के विरुद्ध कार्याही करते हैं और देश की सुरक्षा की दुहाई देते है , मेरा प्रधान मंत्री जी से निवेदन है की पहले वह अपने मंत्री परिषद् तथा अपने बुद्धिजीवी सलाहकारों से सलाह कर ले की आखिर उनकी सरकार चाहती क्या है, ताकि उसके बाद कम से कम उन्हें ये तो पता हो की उन्हें सही मैं करना क्या है अंत में, प्रधान मंत्री जी के आज के संसद मैं दिए भाषण पर सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ की क्या वो सच में भ्रस्ताचार को साथ में लेकर देश की तरक्की और प्रगति कर सकते हैं
By Deepak Kumar (17th-August-2011 02:02:PM)
जो जनता सरकार बनती है वो उसको मिटा भी सकती है, मनमोहन सिंह जी संसद जनता के लिए है जनता संसद के लिए नहीं, तुमको प्रधानमंत्री पद छोड़ देना चाहिए क्योकि तुमरे जेसा मजबूर प्रधानमंत्री आज तक भारत में नहीं हुआ हम जनता को मजबूर प्रधानमंत्री नहीं
By avinash gupta (17th-August-2011 02:01:PM)
माननिया परधानमंत्री जी यदि आप भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर hote तो आप श्री श्री anna जी ka भी बिल संसद में लेकर जाते और भैस करते लेकिन श्री छिबल जी जेसे आप के साथ हे तो असे कसे होगा
By krishan kumar (17th-August-2011 01:58:PM)
समझ में नहीं आ रहा है की भ्रष्टाचार बढ़ने से देश की तरक्की कैसे रुक सकती इसके लिए तो बस नेता लोगों को ही इमानदार होने चयिहे तरक्की अपने आप होती चली जब सोदे में कोई दलाली नहीं होगी तो item भी सस्ती ये बड़े corporate group ही अपना हर जायज/ नाजायज काम करवाने के लिए रिश्वत को बढ़ावा देते हैं जो आम इंसान को देना भरी लगता है और सरकारी बाबु को ज्यादा पैसे लेकर काम करने की आदत पड़ जाती है इसलिए उसे बिना रिश्वत लिए काम करना बड़ा मुश्किल लगता यही पैसा बाबु के through बड़े officers तक distribute होता यही corruption की जड़ यही ये मंत्री लोग नहीं चाहते इसीलिए लोकपाल बिल के खिलाफ हैं और लोकपाल बिल की फाइल सालों से ऑफिस में धूळ फांक रही यही सचाई जय वन्दे
By rv (17th-August-2011 01:57:PM)
लगभग सारे भारतीये जान चुकें हैं की कांग्रेस ६४ वर्सो से कौन सा बिकास करना चाहती है ये तो कांग्रेस का भाग्य की उसके सामने कोई मजबूत बिपक्ष नही है जितना बर्बाद करना था कर लिया अब कांग्रेस की दिन पुरे होने वाले हैं,
By Ambuj singhal (17th-August-2011 01:51:PM)
भारत के प्रधानमंत्री किस प्रगति की बात कर रहे हैं ? महंगाई की प्रगति या भ्रष्टाचार की प्रगति अन्ना हजारे को जंतर मंतर पर अनशन की अनुमति न देना कहाँ का न्याय है ? याद रखें गाँधी जी ने भी अत्याचार के विरुद्ध अनशन का ही रास्ता अपनाया था वाही रास्ता आज के स्वतंत्र भारत में गलत कैसे ? अन्ना जी को अनशन से पहले ही बंदी बनाना सरकार की तानाशाही को दर्शाती है
By amrita sharma (17th-August-2011 01:50:PM)
the statements of prime minister in lok shanbha is totally All congresions said about anna that he was corrupted man so how evey one ready to talk with there is "tanasah sarkar" , prime minister should give resign from his he is " katputali" of
By Mritunjay Kumar (17th-August-2011 01:37:PM)
अगर कोई डॉक्टर पागल होगया हो तो उसकी दबाई लेना चाय किया ? हमारा संसद सभ्य बीमार हा तो उनको ठीक करना हमारा कर्त्तव्य बनता
By MOHANLAL JINDAL (17th-August-2011 01:35:PM)
माननीय प्रदंमंत्री जी भ्रस्ताचार के ख़तम हो जाने से क्या देश की तरक्की रुक जाएगी
By KULDEEP (17th-August-2011 01:34:PM)
अन्ना पर बोले PM, कुछ लोग देश की तरक्की नहीं चाहते, जैसे दिग्बिजय सिंह, कपिल सिब्बल और खासकर कांग्रेस के नेता
By Santosh  (17th-August-2011 01:29:PM)
प्रधान मंत्री जी हम देश की तरक्की के खिलाफ नहीं हैं हम ए राजा, कलमाड़ी, शीला जैसे भ्रष्ट लोगों के खिलाफ हैं उनके खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही नहीं होती आज तक किसी भ्रष्ट को आजीवन कारावास, फांसी या सम्पति जब्त नहीं हुई
By Harish Kumar (17th-August-2011 01:28:PM)
सरकार अन्‍ना के आंदोलन से डर गई है पुलिस ने जो कदम उठाया है, वह पावर का मिस यूज है
By DINESH (17th-August-2011 11:36:AM)
 
 
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