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फिटनेस ट्रेनर, दूसरे फिट तो आप हिट
शैलेंद्र सिंह नेगी
First Published:25-10-11 01:27 PM
इसमें दो राय नहीं कि सेहत को लेकर हमारी मानसिकता बदल रही है। आजकल जिम में युवाओं के साथ बूढ़े और बच्चे भी जम कर पसीना बहा रहे हैं और इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं फिटनेस ट्रेनर। एक करियर के रूप में फिटनेस ट्रेनर के लिए क्या संभावनाएं हैं, इस बारे में बता रहे हैं शैलेंद्र सिंह नेगी
आज जब जिंदगी का हर दिन, हर पल आपकी तरक्की के लिए खासा मायने रखता है, तब सेहत की एक दिन की बेरुखी भी काफी भारी साबित हो सकती है। यही वजह है कि भागदौड़ भरी जिंदगी के बावजूद एकदम फिट रहना हर किसी के लिए जरूरी हो गया है। सेहत के प्रति इस सतर्कता के चलते और अपनी जीवन शैली को सुधारने की कोशिश में लगे लोग अब फिटनेस ट्रेनर्स की शरण में जाने लगे हैं।
लोगों के इस रुझान ने फिटनेस ट्रेनर के काम को हॉट करियर के रूप में तब्दील कर दिया है। जिम, बड़े होटल, हेल्थ क्लब, फिटनेस सेंटर, स्पा और टूरिस्ट रिजॉर्ट, सब जगह फिटनेस ट्रेनर खूब पैसा कमा रहे हैं। कहना न होगा कि फिटनेस इंडस्ट्री उभार पर है। सिर्फ भारत में ही यह इंडस्ट्री 2,000 करोड़ रुपए से भी अधिक की हो गई है। हाई टेक जिम और हेल्थ क्लब ने इसको युवाओं के बीच और अधिक प्रचलित बना दिया है। कुछ अनुभव लेकर आप आप भी फिटनेस सेंटर शुरू कर सकते हैं। बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के लिए समय-समय पर वर्कप्लेस वेलनैस तथा फिटनेस प्रोग्राम का आयोजन करती हैं, जहां फिटनेस ट्रेनर्स की जबर्दस्त मांग है।
क्या है फिटनेस ट्रेनर
पहले एथलीट अपने खेलों में सुधार के लिए ट्रेनर रखते थे, लेकिन अब सिलेब्रिटी से लेकर कॉमनमैन तक खुद को फिट रखने के लिए फिटनेस ट्रेनर रखता है। फिटनेस ट्रेनर बॉडी को शेप देने में मदद करता है। वह फिजिक को फ्लेक्सिबल बनाने और एक्सरसाइज से शरीर का वजन कम करने में अहम भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं, ट्रेनर बॉडी मास इंडेक्स के जरिए बॉडी के अनुसार जरूरी एक्सरसाइज भी बताता है और उम्र और सेहत के मुताबिक क्या डायट हो, इसकी जानकारी भी देता है। फिटनेस ट्रेनर एक ट्रेंड प्रोफेशनल होता है, जिसे ह्यूमन एनाटॉमी की जानकारी होती है। उसे व्यायाम और बायोमैकेनिक्स में भी महारत हासिल होती है। किस-किस तरह के फिटनेस ट्रेनर विशेष ट्रेनर- इस क्षेत्र में फिटनेस एक्सपर्ट फिटनेस के किसी खास एरिया में एक्सपर्ट होते हैं। पर्सनल ट्रेनर- पर्सनल ट्रेनर एक बार में एक ही व्यक्ति को ट्रेनिंग देते हैं। व्यक्ति के डायट चार्ट के साथ ही उसकी सेहत, खान-पान और वर्क स्टाइल का भी ख्याल रखा जाता है। जिम ट्रेनर- जिम में एक साथ कई लोगों को अपनी देखरेख में एक्सरसाइज करवाते हैं। स्पोर्ट्स कोच
फिजिकल थेरेपिस्ट
एथलीट ट्रेनर
डायटीशियन फिटनेस ट्रेनर का कार्य लोगों को फिटनेस की बारीकियां बताना।
फिटनेस टारगेट तय करना।
लोगों के लाइफस्टाइल और उम्र के हिसाब से फिटनेस शेडय़ूल बनाना।
सही फिटनेस के लिए एरोबिक्स, किक बॉक्सिंग, योग, पाइलेट्स, स्पिनिंग, कराटे, स्पिन साइक्लिंग, वेट लिफ्टिंग आदि को ही इस्तेमाल में लाया जाता है। फिटनेस एक्सपर्ट लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से एक्सरसाइज का प्रशिक्षण देते हैं।
फिटनेस एक्सपर्ट डायट चार्ट बनाते हैं। फिटनेस का बिग बाजार
अमेरिकी कम्पनी के एक सर्वे के अनुसार, भारतीय फिटनेस पर औसतन 2600 रुपये से अधिक सालाना खर्च कर रहे हैं। भारत में हेल्थ एंड फिटनेस मार्केट करीब 2,900 करोड़ रुपये से भी अधिक की है और यह 15 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही है। इसे देखते हुए फिटनेस ट्रेनर और योग एक्सपर्ट्स की मांग बढ़ रही है। पहले भारतीय पश्चिमी लोगों की तुलना में फिटनेस के बारे में ज्यादा जागरूक नहीं थे, लेकिन धीरे-धीरे लोगों का एटीटय़ूड बदल रहा है और लोग जिम और हेल्थ सेंटर जॉइन करने लगे हैं। फैक्ट फाइल शैक्षिक योग्यता
भारत में अभी फिटनेस ट्रेनिंग से संबंधित बहुत सारे कोर्स उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन जो कोर्स उपलब्ध हैं, उनके लिए सामान्य तौर पर बारहवीं पास होना जरुरी है। अगर आप विदेश से फिजिकल ट्रेनर की ट्रेनिंग लेना चाहते हैं तो वहां से ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल के कोर्स कर सकते हैं। कमाई की संभावनाएं
शुरुआती दौर में फिटनेस ट्रेनर के तौर पर दस से पंद्रह हजार रुपये हर माह कमा सकते हैं। इस इंडस्ट्री में पहचान बनाना और विश्वास जीतना सबसे बड़ी बात होती है। अगर आपने अपनी पहचान बना ली तो कमाई अनलिमिटेड हो सकती है। आप फिटनेस कन्सलटेंट के तौर पर हर घंटे 10 हजार रुपये तक ले सकते हैं। अगर आपने अपना फिटनेस सेंटर खोल दिया तो कमाई की संभावनाएं और भी बढ़ जाती हैं। कोर्स
यह उभरती हुई इंडस्ट्री है, इसलिए यहां काफी संभावनाएं हैं। गोल्ड्स जिम यूनिवर्सिटी फिटनेस मैनेजमेंट, पर्सनल ट्रेनिंग और ग्रुप एक्सरसाइज में सर्टिफिकेशन ऑफर करती है। कोर्स की अवधि चार महीने है। पर्सनल ट्रेनिंग के लिए और इंडोर साइक्लिंग के लिए 22 घंटे। इसके अलावा नाइक एरोबिक्स कोर्स, रिबॉक इन्स्ट्रक्टर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम और कोई अन्य पॉपुलर कोर्स कर सकते हैं। बेसिक कोर्स 80 घंटे का होता है, जिसमें लगभग 30 घंटे की थ्योरी होती है, बाकी का प्रैक्टिकल होता है। कोर्स के अंत में लिखित परीक्षा और प्रैक्टिकल एग्जाम्स होते हैं। इन्हें पास करने के बाद आप रिबॉक सर्टिफाइड फिटनेस इंस्ट्रुक्टर बन सकते हैं। रिबॉक इंस्ट्रुक्टर एलाएंस प्रोग्राम ढाई महीने या 80 घंटे का होता है। इसके लिए ए-लेवल मास्टर ट्रेनर एग्जाम क्लियर करने के बाद ही आप ट्रेनर के रूप में सर्टिफाई हो पाते हैं। तमिलनाडु फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु ने भी अपने यहां कुछ कोर्स शुरू किए हैं। इंटरनेशनल लेवल पर अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन हेल्थ फिटनेस और क्लिनिकल सर्टिफिकेशन में इंटरनेशनल कोर्स कराते हैं। संस्थान गोल्ड जिम यूनिवर्सिटी, मुंबई
वेबसाइट: www.goldsgymuniversity.com तालवॉकर्स एकेडमी, मुंबई
वेबसाइट: www.talwalkars.net के 11 फिटनेस एकेडमी, मुंबई
वेबसाइट: www.keleven.com तमिलनाडु फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु
वेबसाइट: www.tnpesu.org अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन
वेबसाइट: www.acsm.org सक्सेस स्टोरी
कड़े संघर्ष के बाद सफलता
विजेंद्र सिंह
पर्सनल फिटनेस ट्रेनर फिटनेस अब सक्सेस का फंडा बन चुका है, इसलिए रहिए फिट, बनिए हिट। मैंने भी अपनी जिन्दगी में यही फंडा अपनाया और आज मैं खुद को फिट रखने के साथ-साथ कई और लोगों को भी फिट रखने में मदद कर रहा हूं। मुझे बचपन से ही जिम जाने और बॉडी बनाने का क्रेज था। मैंने इसके लिए कई तरह की ट्रेनिंग की। आज मैं रीबॉक और दि जिम से सर्टिफाइड फिटनेस ट्रेनर हूं। इसमें कोई अनोखी बात नहीं कि मैंने फिटनेस ट्रेनर बनना पसंद किया। जैसे कोई भी डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहता है, ठीक उसी तरह मैंने भी फिटनेस ट्रेनर को अपना करियर चुना। शुरुआती दौर संघर्ष का रहा, लेकिन अब सब ठीक है। जब मैंने यह फील्ड जॉइन किया था, तब यह फील्ड नया-नया था, इसलिए सर्वाइव करना बड़ा चेलेंजिंग रहा। यह फील्ड ऐसा है, जिसमें अनुभव के साथ आप बहुत कुछ सीखते हैं। अगर कोई यह सोचता है कि एक ही रात में चमत्कार हो जाएगा तो यह संभव नहीं है। पहले मेरी कम्युनिकेशन स्किल्स इतनी अच्छी नहीं थीं, लेकिन धीरे-धीरे मैंने इस पर काफी वर्क आउट किया। अब कोई समस्या नहीं है। मैं अभी भी ह्यूमन बॉडी और उसके बारे में आ रही नई रिसर्च के बारे में पढ़ता रहता हूं। इससे मैं अपडेट रहता हूं और आज अपना जिम चलाने के साथ-साथ लोगों को घरों और कम्पनियों में जाकर पर्सनल ट्रेनिंग भी देता हूं। एक्सपर्ट व्यू साइंस बैकग्राउंड बेहतर होगी
अभिषेक चौधरी,
टीम फिजिशियन, इंडियन बॉक्सिंग टीम अगर आपको एक फिटनेस ट्रेनर बनना है तो आपको यंग एज में ही डिसाइड करना पड़ेगा कि आप यही बनना चाहते हैं। अगर आप फिटनेस के प्रति सजग हैं, तभी इस फील्ड में आइए। आपके अंदर बॉडी बिल्डिंग का क्रेज होना चाहिए। अगर आप साइंस बैकग्राउंड से हैं तो आपको इस फील्ड से जुड़ी चीजें समझने में आसानी होगी, क्योंकि सारा का सारा खेल ह्यूमन बॉडी स्ट्रक्चर का है। शुरुआत में भले ही पैसे कम मिलें, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। फिटनेस ट्रेनर ऐसे प्रशिक्षित प्रोफेशनल होते हैं, जो प्रैक्टिकल एजुकेशन, काइनेजियोलॉजी एंड बायोमैकेनिक्स, स्ट्रैंथ ट्रेनिंग वगैरह के फॉर्मल और एनाटमी एंड एक्सरसाइज फिजियोलॉजी में स्पेशलाइज्ड होते हैं। एक अच्छे फिटनेस ट्रेनर को चाहिए कि वह रोजाना अपने कौशल को निखारने के लिए थोड़ा समय दे। इसके अलावा इंडस्ट्री में आ रहे बदलावों की जानकारी रखे। उन्हें तमाम तरह की बीमारियों से ह्यूमन बॉडी और माइंड को बचाने की ट्रेनिंग दी जाती है। इस समय काफी कम भारतीय एक्सरसाइज कर रहे हैं, लेकिन इसका क्रेज दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसलिए इंडस्ट्री में बूम आ रहा है। एक अच्छे फिटनेस ट्रेनर को अपनी स्किल्स को शार्प करते रहने के लिए रोज समय देना चाहिए। इसके अलावा उन्हें लेटेस्ट रिसर्च, ट्रेंड और इंडस्ट्री में कॉम्पिटिशन के बारे में हुई स्टडीज को जानना चाहिए। फिटनेस ट्रेनर को बायोमैकेनिक्स, काइनेजियोलॉजी, एक्सरसाइज टेक्निक्स एनाटॉमी, एक्सरसाइज फिजियोलॉजी और न्यूट्रीशन की ट्रेनिंग लेनी चाहिए। सर्टिफिकेशन के साथ शार्प कम्युनिकेशन स्किल होनी चाहिए। इसके अलावा इस इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों के बारे में अपडेट रहना भी जरूरी है।
पहले एथलीट अपने खेलों में सुधार के लिए ट्रेनर रखते थे, लेकिन अब सिलेब्रिटी से लेकर कॉमनमैन तक खुद को फिट रखने के लिए फिटनेस ट्रेनर रखता है। फिटनेस ट्रेनर बॉडी को शेप देने में मदद करता है। वह फिजिक को फ्लेक्सिबल बनाने और एक्सरसाइज से शरीर का वजन कम करने में अहम भूमिका निभाता है। इतना ही नहीं, ट्रेनर बॉडी मास इंडेक्स के जरिए बॉडी के अनुसार जरूरी एक्सरसाइज भी बताता है और उम्र और सेहत के मुताबिक क्या डायट हो, इसकी जानकारी भी देता है। फिटनेस ट्रेनर एक ट्रेंड प्रोफेशनल होता है, जिसे ह्यूमन एनाटॉमी की जानकारी होती है। उसे व्यायाम और बायोमैकेनिक्स में भी महारत हासिल होती है। किस-किस तरह के फिटनेस ट्रेनर विशेष ट्रेनर- इस क्षेत्र में फिटनेस एक्सपर्ट फिटनेस के किसी खास एरिया में एक्सपर्ट होते हैं। पर्सनल ट्रेनर- पर्सनल ट्रेनर एक बार में एक ही व्यक्ति को ट्रेनिंग देते हैं। व्यक्ति के डायट चार्ट के साथ ही उसकी सेहत, खान-पान और वर्क स्टाइल का भी ख्याल रखा जाता है। जिम ट्रेनर- जिम में एक साथ कई लोगों को अपनी देखरेख में एक्सरसाइज करवाते हैं। स्पोर्ट्स कोच
फिजिकल थेरेपिस्ट
एथलीट ट्रेनर
डायटीशियन फिटनेस ट्रेनर का कार्य लोगों को फिटनेस की बारीकियां बताना।
फिटनेस टारगेट तय करना।
लोगों के लाइफस्टाइल और उम्र के हिसाब से फिटनेस शेडय़ूल बनाना।
सही फिटनेस के लिए एरोबिक्स, किक बॉक्सिंग, योग, पाइलेट्स, स्पिनिंग, कराटे, स्पिन साइक्लिंग, वेट लिफ्टिंग आदि को ही इस्तेमाल में लाया जाता है। फिटनेस एक्सपर्ट लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से एक्सरसाइज का प्रशिक्षण देते हैं।
फिटनेस एक्सपर्ट डायट चार्ट बनाते हैं। फिटनेस का बिग बाजार
अमेरिकी कम्पनी के एक सर्वे के अनुसार, भारतीय फिटनेस पर औसतन 2600 रुपये से अधिक सालाना खर्च कर रहे हैं। भारत में हेल्थ एंड फिटनेस मार्केट करीब 2,900 करोड़ रुपये से भी अधिक की है और यह 15 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रही है। इसे देखते हुए फिटनेस ट्रेनर और योग एक्सपर्ट्स की मांग बढ़ रही है। पहले भारतीय पश्चिमी लोगों की तुलना में फिटनेस के बारे में ज्यादा जागरूक नहीं थे, लेकिन धीरे-धीरे लोगों का एटीटय़ूड बदल रहा है और लोग जिम और हेल्थ सेंटर जॉइन करने लगे हैं। फैक्ट फाइल शैक्षिक योग्यता
भारत में अभी फिटनेस ट्रेनिंग से संबंधित बहुत सारे कोर्स उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन जो कोर्स उपलब्ध हैं, उनके लिए सामान्य तौर पर बारहवीं पास होना जरुरी है। अगर आप विदेश से फिजिकल ट्रेनर की ट्रेनिंग लेना चाहते हैं तो वहां से ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल के कोर्स कर सकते हैं। कमाई की संभावनाएं
शुरुआती दौर में फिटनेस ट्रेनर के तौर पर दस से पंद्रह हजार रुपये हर माह कमा सकते हैं। इस इंडस्ट्री में पहचान बनाना और विश्वास जीतना सबसे बड़ी बात होती है। अगर आपने अपनी पहचान बना ली तो कमाई अनलिमिटेड हो सकती है। आप फिटनेस कन्सलटेंट के तौर पर हर घंटे 10 हजार रुपये तक ले सकते हैं। अगर आपने अपना फिटनेस सेंटर खोल दिया तो कमाई की संभावनाएं और भी बढ़ जाती हैं। कोर्स
यह उभरती हुई इंडस्ट्री है, इसलिए यहां काफी संभावनाएं हैं। गोल्ड्स जिम यूनिवर्सिटी फिटनेस मैनेजमेंट, पर्सनल ट्रेनिंग और ग्रुप एक्सरसाइज में सर्टिफिकेशन ऑफर करती है। कोर्स की अवधि चार महीने है। पर्सनल ट्रेनिंग के लिए और इंडोर साइक्लिंग के लिए 22 घंटे। इसके अलावा नाइक एरोबिक्स कोर्स, रिबॉक इन्स्ट्रक्टर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम और कोई अन्य पॉपुलर कोर्स कर सकते हैं। बेसिक कोर्स 80 घंटे का होता है, जिसमें लगभग 30 घंटे की थ्योरी होती है, बाकी का प्रैक्टिकल होता है। कोर्स के अंत में लिखित परीक्षा और प्रैक्टिकल एग्जाम्स होते हैं। इन्हें पास करने के बाद आप रिबॉक सर्टिफाइड फिटनेस इंस्ट्रुक्टर बन सकते हैं। रिबॉक इंस्ट्रुक्टर एलाएंस प्रोग्राम ढाई महीने या 80 घंटे का होता है। इसके लिए ए-लेवल मास्टर ट्रेनर एग्जाम क्लियर करने के बाद ही आप ट्रेनर के रूप में सर्टिफाई हो पाते हैं। तमिलनाडु फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु ने भी अपने यहां कुछ कोर्स शुरू किए हैं। इंटरनेशनल लेवल पर अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन हेल्थ फिटनेस और क्लिनिकल सर्टिफिकेशन में इंटरनेशनल कोर्स कराते हैं। संस्थान गोल्ड जिम यूनिवर्सिटी, मुंबई
वेबसाइट: www.goldsgymuniversity.com तालवॉकर्स एकेडमी, मुंबई
वेबसाइट: www.talwalkars.net के 11 फिटनेस एकेडमी, मुंबई
वेबसाइट: www.keleven.com तमिलनाडु फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु
वेबसाइट: www.tnpesu.org अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन
वेबसाइट: www.acsm.org सक्सेस स्टोरी
कड़े संघर्ष के बाद सफलता
विजेंद्र सिंह
पर्सनल फिटनेस ट्रेनर फिटनेस अब सक्सेस का फंडा बन चुका है, इसलिए रहिए फिट, बनिए हिट। मैंने भी अपनी जिन्दगी में यही फंडा अपनाया और आज मैं खुद को फिट रखने के साथ-साथ कई और लोगों को भी फिट रखने में मदद कर रहा हूं। मुझे बचपन से ही जिम जाने और बॉडी बनाने का क्रेज था। मैंने इसके लिए कई तरह की ट्रेनिंग की। आज मैं रीबॉक और दि जिम से सर्टिफाइड फिटनेस ट्रेनर हूं। इसमें कोई अनोखी बात नहीं कि मैंने फिटनेस ट्रेनर बनना पसंद किया। जैसे कोई भी डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहता है, ठीक उसी तरह मैंने भी फिटनेस ट्रेनर को अपना करियर चुना। शुरुआती दौर संघर्ष का रहा, लेकिन अब सब ठीक है। जब मैंने यह फील्ड जॉइन किया था, तब यह फील्ड नया-नया था, इसलिए सर्वाइव करना बड़ा चेलेंजिंग रहा। यह फील्ड ऐसा है, जिसमें अनुभव के साथ आप बहुत कुछ सीखते हैं। अगर कोई यह सोचता है कि एक ही रात में चमत्कार हो जाएगा तो यह संभव नहीं है। पहले मेरी कम्युनिकेशन स्किल्स इतनी अच्छी नहीं थीं, लेकिन धीरे-धीरे मैंने इस पर काफी वर्क आउट किया। अब कोई समस्या नहीं है। मैं अभी भी ह्यूमन बॉडी और उसके बारे में आ रही नई रिसर्च के बारे में पढ़ता रहता हूं। इससे मैं अपडेट रहता हूं और आज अपना जिम चलाने के साथ-साथ लोगों को घरों और कम्पनियों में जाकर पर्सनल ट्रेनिंग भी देता हूं। एक्सपर्ट व्यू साइंस बैकग्राउंड बेहतर होगी
अभिषेक चौधरी,
टीम फिजिशियन, इंडियन बॉक्सिंग टीम अगर आपको एक फिटनेस ट्रेनर बनना है तो आपको यंग एज में ही डिसाइड करना पड़ेगा कि आप यही बनना चाहते हैं। अगर आप फिटनेस के प्रति सजग हैं, तभी इस फील्ड में आइए। आपके अंदर बॉडी बिल्डिंग का क्रेज होना चाहिए। अगर आप साइंस बैकग्राउंड से हैं तो आपको इस फील्ड से जुड़ी चीजें समझने में आसानी होगी, क्योंकि सारा का सारा खेल ह्यूमन बॉडी स्ट्रक्चर का है। शुरुआत में भले ही पैसे कम मिलें, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। फिटनेस ट्रेनर ऐसे प्रशिक्षित प्रोफेशनल होते हैं, जो प्रैक्टिकल एजुकेशन, काइनेजियोलॉजी एंड बायोमैकेनिक्स, स्ट्रैंथ ट्रेनिंग वगैरह के फॉर्मल और एनाटमी एंड एक्सरसाइज फिजियोलॉजी में स्पेशलाइज्ड होते हैं। एक अच्छे फिटनेस ट्रेनर को चाहिए कि वह रोजाना अपने कौशल को निखारने के लिए थोड़ा समय दे। इसके अलावा इंडस्ट्री में आ रहे बदलावों की जानकारी रखे। उन्हें तमाम तरह की बीमारियों से ह्यूमन बॉडी और माइंड को बचाने की ट्रेनिंग दी जाती है। इस समय काफी कम भारतीय एक्सरसाइज कर रहे हैं, लेकिन इसका क्रेज दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसलिए इंडस्ट्री में बूम आ रहा है। एक अच्छे फिटनेस ट्रेनर को अपनी स्किल्स को शार्प करते रहने के लिए रोज समय देना चाहिए। इसके अलावा उन्हें लेटेस्ट रिसर्च, ट्रेंड और इंडस्ट्री में कॉम्पिटिशन के बारे में हुई स्टडीज को जानना चाहिए। फिटनेस ट्रेनर को बायोमैकेनिक्स, काइनेजियोलॉजी, एक्सरसाइज टेक्निक्स एनाटॉमी, एक्सरसाइज फिजियोलॉजी और न्यूट्रीशन की ट्रेनिंग लेनी चाहिए। सर्टिफिकेशन के साथ शार्प कम्युनिकेशन स्किल होनी चाहिए। इसके अलावा इस इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों के बारे में अपडेट रहना भी जरूरी है।
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