सोमवार, 21 मई, 2012 | 20:04 | IST
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कला विषयों में करियर के हैं काफी विकल्प
फजले गुफरान
First Published:01-02-12 02:31 PM
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कला का क्षेत्र काफी व्यापक है। यह सागर की तरह है। इसमें राजनीति विज्ञान, इतिहास, मनोविज्ञान, भूगोल, अर्थशास्त्र जैसे अनगिनत विषय समाहित हैं। इन्हें एक जगह सहेजना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। इस अंक में कला क्षेत्र के दो अहम विषयों राजनीति विज्ञान और इतिहास में करियर की संभावनाओं की चर्चा कर रहे हैं फजले गुफरान

राजनीति विज्ञान
राजनीति विज्ञान राजनीति से जुड़े हर सिद्घांत और व्यवहार का विज्ञान है। यह देश या किसी संगठन के राजनीतिक ढांचे, राजनीतिक व्यवहार और राजनीतिक प्रणाली का अध्ययन कराता है। इसका क्षेत्र बहुत व्यापक है, जिसमें ऐतिहासिक और आधुनिक प्रणालियों, सरकारी नीतियों व प्रक्रियाओं, विदेश नीतियों, लोकप्रशासन, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सार्वजनिक मामलों का अध्ययन शामिल है। थोड़ा और बारीकी से समझों तो राजनीति विज्ञान हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह हमारी शिक्षा, रोजगार, जीवनशैली, कर प्रणाली, सभी नीति-निर्माताओं के राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करता है। इसके अलावा भावी नेताओं को तैयार करने में भी इस विषय की निर्णायक भूमिका होती है। यह एक ऐसा विषय है, जिसमें उन विद्यार्थियों के सीखने के लिए बहुत कुछ है, जो जानना चाहते हैं कि किस प्रकार जनसमूह अपने आपको शासित करते हैं, किस तरह नीतियां बनाई जाती हैं और किस तरह से स्थानीय, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक नीतियों में सुधार लाया जा सकता है।

किस तरह का काम
किसी भी विषय की पढ़ाई करने वाला छात्र राजनीति विज्ञान को अपना सकता है। इसके लिए देश से संबंधित मसलों की गहन खोज-परख तथा जांच-पड़ताल करने की जरूरत होती है। राजनीति विज्ञान विभिन्न सरकारी विभागों की वित्तीय गतिविधियों पर नियंत्रण करने का अवसर देता है। बजट और उसकी प्रक्रिया के निर्धारण, उसकी विशेषताओं, उद्देश्यों तथा बजट के विभिन्न सिद्घांतों तथा बजट लागू करने में राजनीतिक विज्ञान का अपना महत्व होता है। यह कर्मचारी को संस्थान की अवधारणा तथा संगठन में मानव-व्यवहार के आकलन में भी मदद करता है।

लोन
राजनीति विज्ञान में अगर कोई पीएचडी करना चाहता हो या रिसर्च का काम कर रहा हो तो उसके लिए कई जगह से फंडिंग होती है, इनमें मुख्य हैं यूजीसी, आईसीएसएसआर आदि। आप किसी समसामयिक मुद्दे, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर फैलोशिप भी प्राप्त कर सकते हैं।

योग्यता
12वीं के बाद राजनीति विज्ञान में स्नातक डिग्री ली जा सकती है और उसके बाद स्नातकोत्तर किया जा सकता है। पीएचडी का विकल्प भी इसमें खुला है। जो विद्यार्थी कला क्षेत्र में स्नातक करना चाहते हैं, वे राजनीति विज्ञान में ऑनर्स कर सकते हैं या पास कोर्स में एक विषय के रूप में इसे रख सकते हैं। 

करियर विकल्प
राजनीति विज्ञान पढ़ने वाले अधिकतर शैक्षिक संस्थानों में रोजगार पाते हैं। इसके अलावा राज्य और केंद्र सरकार की नौकरियों में भी इनके लिए तमाम अवसर खुले हुए हैं। राजनीति विज्ञान पढ़ कर राजनीतिक विश्लेषक बना जा सकता है, सिविल सर्विसेज में शामिल हुआ जा सकता है। जो लोग कानून के क्षेत्र में कुछ करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह विषय काफी लाभदायक हो सकता है। शोध का क्षेत्र भी इस विषय के विद्यार्थियों के लिए खुला है। ऐसे तमाम शोध संस्थान और विश्वविद्यालय मौजूद हैं, जहां रिसर्च एनालिस्ट, रिसर्च फैलो या रिसर्च एसोसिएट की जरूरत पड़ती है, जो अलग-अलग परियोजनाओं में काम करते हैं। यही नहीं, पत्रकार बनने में भी यह विषय मददगार साबित हो सकता है, क्योंकि खबरों का अधिकांश हिस्सा राजनीति के इर्दगिर्द घूमता है।

इतिहास में भी कर सकते हैं भविष्य की तलाश
इतिहास सभ्यताओं का प्रामाणिक दस्तावेज है। इसमें वह सब कुछ दर्ज है, जो विश्व की विभिन्न सभ्यताओं ने अपने विकास के क्रम में किया। मनुष्य होमिनायड से होमो सेपियन्स कैसे बना, खाद्य संग्रहण से कृषि कार्य तक किस तरह पहुंचा, सभ्यता के किस चरण में समाज का क्या रूप था, जीवनशैली कैसी थी, लोक शैली/लोकाचार कैसा था, कौन कौन सी संस्थाएं विद्यमान थीं, युद्घ प्रणाली क्या थी, शासन किस तरह चलता था, रोजगार और काराधान का क्या स्वरूप था, किस चरण में महिलाओं की स्थिति कैसी थी, ऐसी सारी व्याख्याएं प्रमाण सहित हमें इतिहास के पन्नों से प्राप्त होती है। इसी के साथ यह व्याख्या भी जुड़ी होती है कि सभ्यता के वर्तमान दौर का जो स्वरूप है, वह ऐसा ही क्यों है। किंतु, जहां तक इतिहास को समझने-समझाने का प्रश्न है तो राजवंशों, युद्घों, साम्राज्यों, शासन प्रणालियों, तिथियों, धार्मिक व्यवस्थाओं को पढ़ लेना ही इतिहास का जानकार होना नहीं है। पहले कौन-सी भाषा या लिपि थी या आज कौन सी भाषा/लिपि है, यह सिर्फ सूचना नहीं है, वरन हर चरण में मनुष्य/समाज  में आए बदलाव के क्या कारण थे, इसे जानने-परखने का नाम है इतिहास। जहां तक अध्ययन का प्रश्न है तो किसी भी काल में विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है। भारतीय इतिहास के अलावा अन्य सभ्यताओं का भी इतिहास पढ़ा जा सकता है।

कार्य की प्रकृति
एक इतिहासकार शिल्प तथ्यों, वस्तु भग्नावशेषों, स्मारक अवशेषों, भवन अवशेषों, प्राचीन मुद्राओं, जीवाष्मों, प्राचीन पुस्तकों, शिलालेखों, मंदिरों, मूर्तियों, ताम्र पत्रों, गुफा चित्रों, ऐतिहासिक घटनाओं के अभिलेखों की पहचान करता है और उनका बारीक अध्ययन करता है। तत्पश्चात उसके संबंध में एक तार्किक और प्रामाणिक निष्कर्ष सामने रखता है। इन्हीं निष्कर्षो के आलोक में हम यह जान पाते हैं कि अतीत में घटी विभिन्न घटनाओं के पीछे क्या था।

योग्यता
बारहवीं के बाद इतिहास विषय में स्नातक कर सकते हैं और उसके बाद स्नातकोत्तर किया जा सकता है। पीएचडी भी कर सकते हैं। इतिहास में ऑनर्स के साथ पास कोर्स भी होता है। इतिहास में जो विषय पढ़ाए जाते हैं, वे इस प्रकार हैं- प्राचीन, मध्य और आधुनिक काल का इतिहास, उसकी शासन प्रणालियों, उस समय के राजवंशों, साम्राज्यों, धार्मिक व्यवस्थाओं के साथ भाषा व लिपि के बारे में पढ़ाया जाता है।

प्रमुख संस्थान/इतिहास
दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
पटना विश्वविद्यालय, पटना
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद

कहां-कहां हैं संभावनाएं
इतिहास जैसे विषय के बारे में आम धारणा बनी हुई है कि यह परीक्षाओं के लिए एक विषय है, सिविल सर्विसेज का एक रोचक सब्जेक्ट है और इससे टीचर या प्रोफेसर की जॉब प्राप्त की जा सकती है, लेकिन इससे इतर भी इसमें भविष्य तलाशा जा सकता है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट से लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में बतौर क्यूरेटर,  एपिग्राफिक असिस्टेंट, टेक्निकल असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद में बतौर टेक्निकल असिस्टेंट, रिसर्च एसोसिएट, रिसर्च फैलो, आर्काइविस्ट, संग्रहालयों में बतौर टेक्निकल असिस्टेंट, असिस्टेंट क्यूरेटर इत्यादि।

कौशल
इसके लिए नेतृत्व गुण, अंतर पारस्परिक संबंध, संप्रेषण कौशल, न्यायप्रियता, निर्णय लेने की क्षमता तथा तनाव ङोलने की आदत का होना जरूरी है।

एक्सपर्ट व्यू/राजनीति विज्ञान
एडवाइजर भी बन सकते हैं आप

महेन्द्र प्रसाद सिंह
रिटायर्ड डीन, हेड एंड प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय

राजनीति विज्ञान में करियर की संभावनाएं कितनी हैं?
सिविल सर्विसेज, बतौर शिक्षक तो स्कोप है ही, राजनीतिक विज्ञान के छात्रों के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट में भी काफी स्कोप है। बात किसी भी समसामयिक विषय की हो या सोशल रिफॉर्म्स की, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मामलों की आप रिसर्च कर सकते हैं। यूजीसी राजनीति विज्ञान के उन शिक्षकों को फैलोशिप देती है, जो रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करना चाहते हैं। आईसीएसएसआर भी रिसर्च के लिए फंडिंग करता है। आप राजनीति विज्ञान पढ़ कर राजनीतिक विश्लेषक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एनजीओ, दूतावास में बतौर एडवाइजर नियुक्त हो सकते है, चुनाव विश्लेषक बन सकते हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी मांग है।

आज के दौर में राजनीति विज्ञान किस तरह लाभकारी है?
राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करने से आपको बेसिक ज्ञान तो मिल ही जाता है, आप भारतीय शासन और संविधान, कानून, इंस्टीटय़ूशन, लोक प्रशासन के बारे में भी जान पाते हैं।

नेतृत्व विकास के लिए राजनीति विज्ञान की पढ़ाई कितनी जरूरी है?
यूं तो सब्जेक्ट से इसका कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन राजनीतिक विज्ञान की पढ़ाई आपको बेसिक ज्ञान जरूरी देती है। आप भारतीय संविधान, संस्कृति के बारे में जान पाते हैं। आपको थ्योरी का पता चलता है। भले ही इसकी पढ़ाई से प्रैक्टिकल ज्ञान न मिले, थ्योरिटकल ज्ञान जरूर हासिल हो जाता है।

सक्सेस स्टोरी/राजनीति विज्ञान
कोर्स एक, पर अवसर अनेक

सोनू त्रिवेदी
असिस्टेंट प्रोफेसर- जाकिर हुसैन कॉलेज, नई दिल्ली

शुरू में राजनीति विज्ञान चुनने के पीछे कुछ खास वजह नहीं थी। 12वीं में अंक बेहतर थे। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रुचि शुरू से थी। मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज में दाखिला ले लिया। एमए के दौरान मन में ख्याल आया कि सिविल सर्विसेज या टीचिंग की तरफ रुख करूं। पीएचडी करने के बाद मुझे बतौर रिसर्च एसोसिएट सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के लिए काम मिला। मैंने डेमोक्रेटाइजेशन इन म्यंमार पर रिसर्च किया है। फिलवक्त इंडो-चाइना डायनमिक्स इन म्यंमार पर रिसर्च कर रही हूं। बीते छह वर्ष से जाकिर हुसैन कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर काम कर रही हूं। पॉलिटिकल साइंस में बहुत स्कोप है, जैसे सिविल सर्विसेज, टीचिंग, राजनीतिक विश्लेषक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के एनजीओ, दूतावास में एडवाइजर की जबरदस्त डिमांड है। यूजीसी में बाकायदा राजनीति विज्ञान के लिए अलग से फंडिंग होती है। आईसीएसएसआर भी रिसर्च के लिए फंडिंग करता है। इसके अलावा स्विस एजेंसीज भी आर एंड डी के लिए योगदान करती हैं। कुल मिला कर  किसी भी समसामयिक विषय पर रिसर्च कर सकते हैं। राजनीति विज्ञान के छात्रों को फैलोशिप और स्कॉलरशिप भी दी जाती है।

सक्सेस स्टोरी/इतिहास
इतिहास फायदे का सौदा

राजीव कुमार वर्मा
एसोसिएट प्रोफेसर-सत्यवती कॉलेज ईवनिंग

बात 1980 की है, जब हिन्दू कॉलेज में हिस्ट्री (ऑनर्स) में एडमिशन लिया। जैसा सभी छात्र सोचते थे कि सिविल सर्विसेज या टीचिंग में जाना है, मैं भी यही सोचता था। यूपीएससी में चार बार इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन बात बन नहीं पाई। फिर मैंने टीचिंग की तरफ रुख किया। एमफिल किया, यूजीसी से फैलोशिप भी मिली। फ्यूडल सोशल फॉर्मेशन और रिलिजन इन सोसायटी नामक पुस्तक भी प्रकाशित हुई है। इतिहास निरंतर संवाद है भूत और वर्तमान का। इसमें रिसर्च की अनंत संभावनाएं हैं। कई संस्थाओं से फैलोशिप हासिल कर सकते हैं। ट्रेवल एंड टूरिज्म में इतिहास का बहुत महत्व है। इतिहास में अगर रुचि है तो इसे जरूर पढ़ें, बहुत ही फायदे का सौदा है।

एक्सपर्ट व्यू/इतिहास
खुद को जानने का अवसर
रिजवान कैसर
एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ हिस्ट्री एंड कल्चर (जामिया मिल्लिया इस्लामिया)

बीते पचास वर्षों में इतिहास के पढ़ने का तरीका बिलकुल बदल गया है। पहले राजा-रजवाड़ों, साम्राज्यों, शासन प्रणालियों, तिथियों, धार्मिक व्यवस्थाओं की बात होती थी, अब सोशल कल्चर और इकॉनोमी की बात होती है। यह कह सकते हैं कि इतिहास एक सतत चलने वाला विषय है। जिस तरह इकोनॉमिक्स बाजार की समझ विकसित करती है, वहीं इतिहास अपने बारे में जानने-समझने का अवसर देता है। अगर बात इतिहास में करियर की करें तो इसका स्कोप सिर्फ टीचिंग, सिविल सर्विसेज में ही नहीं है, आज इतिहास के जानकारों की मांग आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट से लेकर भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद तक में है।

अब राजनीति में जाने के लिए भी कोर्स
शहनवाज चौधरी
डायरेक्टर, इंस्टीटय़ूट ऑफ पोलिटिकल लीडरशिप

देश की राजनीतिक हलचलों के बीच कुछ ऐसे कोर्स करवाए जाने लगे हैं, जो राजनीति के रंगरूटों को राजनीति का हर हुनर, हर पेंच, हर दांव, हर विचार, हर दल के बारे में बताने, समझाने, सिखाने और राजनीति को नसों में उतारने का काम कर रहे हैं। कोर्स में विभिन्न राजनीतिक दलों की विचारधारा पर मंथन होता है, भारतीय संविधान के हर अनुच्छेद को समझाया जाता है, जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की जानकारी दी जाती है और सरकार कैसे बनती है, इसकी जानकारी दी जाती है, साथ ही नामांकन भरना, स्टेज मैनेजमेंट, लीडरशिप स्किल, आचार संहिता इत्यादि के बारे में गंभीरता और बारीकी से बताया जाता है।

 
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