सोमवार, 21 मई, 2012 | 20:36 | IST
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सोनू की प्लेट से गायब कौन?
नमिता श्रीवास्तव
First Published:06-02-12 01:56 PM
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सुबह जब सोनू की नींद खुली तो वो ये सोचकर कि अरे, ये तो बस एक सपना था, भूल गया, लेकिन उसके बाद मम्मी जब भी उसे खाना देती तो उसकी थाली से सारी सब्जियां गायब हो जातीं। सबकी थाली में सब्जियां होतीं, पर उसकी थाली में केवल रोटी ही होती

सोनू एक बहुत ही प्यारा बच्चा था। पढ़ाई में भी अव्वल और खेल-कूद में भी। बस उसकी एक आदत अच्छी नहीं थी कि वो सब्जियों को हाथ भी नहीं लगाता था। मम्मी को कभी डांट-डपटकर तो कभी प्यार से मनाकर उसे खिलाना पड़ता था। ये सब देखकर सब्जियों को बड़ा दुख होता था। उन्होंने आपस में सलाह की कि सोनू बाकी सारे काम तो अच्छे करता है, तो क्यों न उसे समझाने की कोशिश की जाए। उन्होंने सोचा कि हम बारी-बारी से सोनू के सपने में जाकर अपनी-अपनी विशेषताएं बताएंगे तो शायद सोनू हमें खाने लग जाए।
ये सब सोचकर पहले पालक उसके सपने में गई। उसने कहा, ‘सोनू! देखो मैं पालक हूं। मुझमें बहुत आइरन होता है। तुम मुङो खाकर शक्तिशाली बन सकते हो। मैं तुम्हारे विकास में बहुत सहायता कर सकती हूं, इसलिए तुम्हें मुङो खाना चाहिए।’ सोनू ने ये सुनकर उत्तर दिया, ‘तो मैं क्या करूं? मुझे तुम्हारी शक्ल ही नहीं अच्छी लगती तो मैं खाऊंगा क्या? चली जाओ यहां से।’ पालक बहुत ही उदास हो गई और चुपचाप वापस चली आई।
अब गाजर गई। उसने कहा, ‘सोनू! मैं तो  कितनी लाल-लाल हूं और पता है मुझमें बहुत सारा विटामिन ‘ए’ होता है, जो तुम्हारी आंखों को ठीक रखता है और फिर मैं तो बहुत मीठी भी होती हूं।’ सोनू मुंह चिढ़ाकर बोला, ‘मैं तो मीठा खाता ही नहीं, इसलिए तुम भी जाओ।’ गाजर बेचारी क्या करती, चली आई।

फिर बारी आई चुकन्दर की। उसने कहा, ‘सोनू मैं तुम्हारे शरीर में रक्त की कमी को पूरा करती हूं। मैं तो सलाद में ऐसे भी खाई जा सकती हूं। तुम मुझे खाओगे तो कभी भी कमजोरी नहीं आएगी।’ सोनू बोला, ‘लेकिन तुम्हारा स्वाद ही इतना गंदा होता है कि क्या बताऊं? मुझे तो उल्टी आ जाती है।’ ये सुनकर चुकन्दर रोने लगी।

सब्जियों का राजा बैंगन बहुत देर से ये सब देख रहा था। सब्जियों का अपमान उससे सहन नहीं हुआ। उसने सब्जियों को रोक दिया और खुद सोनू के सपने में गया। उसने कहा, ‘बस सोनू! बहुत हो गया। हमने तुम्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन तुमने हमारा मजाक उड़ाया। आज के बाद जब तक तुम सब्जियों की एहमियत नहीं समझते हम तुम्हारे भोजन का हिस्सा नहीं बनेंगे।’

सुबह जब सोनू की नींद खुली तो वो ये सोचकर कि अरे, ये तो बस एक सपना था, भूल गया, लेकिन उसके बाद मम्मी जब भी उसे खाना देती, उसकी थाली से सारी सब्जियां गायब हो जातीं। सबकी थाली में सब्जियां होतीं, पर उसकी थाली में केवल रोटी ही होती। काफी दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। मम्मी ये सब देखकर बहुत परेशान हो गई। उन्होंने सोनू से पूछा, ‘ये सब क्या हो रहा है? तुम मुझसे क्या छुपा रहे हो?’ तब सोनू ने सपने की सारी बात मम्मी को बताई और कहा, ‘मम्मी! अब मैं सब्जियों की अहमियत समझ चुका हूं। सब्जियां न खा पाने  की वजह से मुझे बहुत ही कमजोरी महसूस होने लगी है। मैं कोई भी काम ठीक तरह से नहीं कर पा रहा हूं। बताओ ना, अब मैं क्या करूं?’ सुनकर मम्मी बहुत ही खुश हो गईं। उन्होंने कहा, ‘तुमने सब्जियों का अपमान किया था, इसलिए वो तुमसे नाराज हो गई हैं। तुम उनसे सच्चे मन से माफी मांगोगे तो वो तुम्हें जरूर माफ कर देंगी।’

सोनू ने सभी सब्जियों से माफी मांगी और कहा—मुझे समझ में आ गया है कि बिना तुम लोगों के मैं हमेशा कमजोर रहूंगा, ना ठीक से पढ़ाई कर पाऊंगा और ना ठीक से खेल पाऊंगा। क्या तुम लोग मुझसे दोस्ती करोगे?

सब्जियों ने खुशी-खुशी हां कहा और फिर से सब उसकी प्लेट में आ गए।
पता है सोनू को इससे क्या फायदा हुआ? वह पढ़ाई में भी फस्र्ट आया और स्पोर्ट्स में भी।

 
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