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विकास के पुल
First Published:22-02-12 09:20 PM
एक पुल ने आसान की जिंदगी
कोसी प्रमंडल के भवटियाही में 8 फरवरी को कोसी नदी पर निर्मित 1.8 किलोमीटर और तिरहुत प्रमंडल के पिल्खी में बूढ़ी गंडक नदी पर निर्मित 280 मीटर लंबे सेतु का 7 फरवरी को उद्घाटन हुआ। ये दोनों पुल बिहार के विकास में मील के पत्थर साबित होंगे। कोसी पर पुल के निर्माण से मंडन मिश्र और महाकवि विद्यापति के दो हिस्से में आठ दशक पूर्व बंट गया राज्य का मिथिलांचल अब एक कड़ी में फिर से जुड़ गया है। दरअसल बिहार के 16 नेपाल सीमावर्ती जिलों में नेपाल से आने वाली नदियों का जाल बिछा है। इन नदियों की बाढ़ से हर साल तबाही तो होती ही है, आवागमन भी बाधित होता है। ऐसे में इन इलाकों में अनेक स्थानों पर ऊंचे और लंबे पुल की आवश्यकता है। कोसी महासेतु ने न केवल बंटे हुए मिथिलांचल को जोड़ दिया है, बल्कि बिहार से पश्चिम में गुजरात के पोरबंदर और पूरब में आसाम के सिलचर तक आवागमन को सुगम बना दिया है। मुजफ्फरपुर-पूसा रोड में पिल्खी घाट पुल पर निर्मित पुल से पटना से दरभंगा-मधुबनी और सुपौल जाने वालों को आसानी हो गई है। अब पटना से महुआ होते हुए दरभंगा की दूरी भी कम हो गई है। दरभंगा जाने वालों को मुजफ्फरपुर जाने की जरूरत नहीं रही। कई पुलों का निर्माण जारी है
नीतीश कुमार की सरकार ने रोड कनेक्टिविटी के लिए सबसे महत्वपूर्ण पुलों के निर्माण को सर्वाधिक प्राथमिकता दी है। सत्ता संभालने के तुरंत बाद से की गई पहल रंग लाने लगी है। एनडीए-1 के पांच वर्षों के दौरान सात बड़े सेतुओं की नींव पड़ी। 3954 करोड़ की लागत से प्रदेश में ये सात बड़े सेतु बन रहे हैं। गंगा नदी पर दो, कोसी पर दो, गंडक पर दो और सोन नदी पर एक बड़े सेतु का निर्माण चल रहा है। गंगा नदी पर निर्माणाधीन बड़े सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार की दूरी कम करेंगे। चार सेतु उत्तर बिहार की दिशा-दशा बदलेंगे तो एक दक्षिण बिहार की भौगोलिक दूरी कम करेगा। गंगा नदी पर बख्तियारपुर-ताजपुर और आरा-छपरा के बीच सेतु निर्माणाधीन है। साढ़े पांच किलोमीटर लम्बे बख्तियारपुर-ताजपुर महासेतु के बनने से पटना से समस्तीपुर, दरभंगा, बेगूसराय, मधुबनी समेत उत्तर बिहार के कई जिलों की दूरी में 30 से लेकर 50 कि.मी. की कमी होगी। नालन्दा, गया, बिहारशरीफ, नवादा और झारखंड के हजारीबाग, रांची आदि मुख्य शहरों से उत्तर बिहार की तरफ जाने वाली गाड़ियों को महात्मा गांधी सेतु से गुजरने की जरुरत नहीं होगी। इन जगहों की गाड़ियां बख्तियारपुर-पटोरी महासेतु पार कर उत्तर बिहार पहुंच जाएंगी। गंगा नदी पर ही आरा के बबुरा और छपरा के डोरीगंज के बीच एक अन्य महासेतु का निर्माण जारी है। इसके निर्माण से महात्मा गांधी सेतु पर गाड़ियों का दबाव कम होगा। वहीं आरा, रोहतास, कैमूर, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद आदि जिलों से छपरा, सीवान और गोपालगंज होते हुए उत्तर प्रदेश की दूरी कम हो जाएगी। कोसी नदी पर सहरसा में बलुआहा घाट और नवगछिया में विजय घाट में सेतु बन रहा है। कोशी-पूर्णिया प्रमंडल के बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में दो बड़े सेतु बन रहे हैं। भागलपुर से मधेपुरा, सहरसा और सुपौल जिले का आवागमन आसान करने वाले विजय घाट महासेतु से मधेपुरा जिला के भटगांव से भागलपुर के नवगछिया तक पुल का विस्तार होगा। चार लेन वाले इस सेतु के बनने से भागलपुर प्रमंडल से कोसी की दूरी काफी कम हो जाएगी। भागलपुर से मधेपुरा की दूरी 51 कि.मी., सहरसा की 25 कि.मी. और सुपौल की दूरी 25 कि.मी. छोटी होगी। कोसी पर सहरसा में बलुआहा घाट पुल का निर्माण हो जाने से करीब हर वर्ष बाढ़ का सामना करने वाले लाखों की आबादी को बड़ी राहत मिलेगी। सहरसा-सुपौल की भी दूरी भी कम हो जाएगी। गंडक नदी पर पर बगहा में रतवल घाट और गोपालगंज के विशुनपुर में सेतु निर्माण चालू है। रतवल घाट पुल से पश्चिम चम्पारण के वन क्षेत्र से मैदानी क्षेत्र में आने का रास्ता सुगम हो जाएगा। वहीं गोपालगंज के विशुनपुर में बन रहे सेतु से उत्तर प्रदेश और बिहार के सीवान और गोपालगंज से मोतिहारी-बेतिया की दूरी 50 से 100 कि.मी. कम हो जाएगी। सोन नदी पर अरवल-सहार के बीच सेतु का निर्माण तेजी से चल रहा है। इससे भोजपुर और रोहतास से अवरल, जहानाबाद, गया और औरंगाबाद की दूरी कम हो जाएगी। इसके अतिरिक्त बागमती नदी पर पिपराही और मांडर, बुढ़ी गंडक नदी पर रंगही और चकिया-गोविन्द-मधुबन पथ पर तथा सिकहरना नदी पर जटवा घाट में करोड़ों की लागत से पुल का निर्माण जारी है। केंद्र प्रायोजित पुल निर्माण
केन्द्र सरकार दो महासेतु का निर्माण करा रही है। तीन नए फोर लेन सेतु का निर्माण करने को तैयार है। मनिहारी-साहेबगंज के बीच गंगा नदी पर एक और सेतु बनाने की मंजूरी दी गई है। इससे बिहार और झारखंड दोनों राज्यों को फायदा होगा। इसके अतिरिक्त क्षतिग्रस्त डुमरी सेतु के पुनर्स्थापन की भी हरी झंडी मिली है। 50 करोड़ की लागत से सेतु के चार क्षतिग्रस्त पायों और उनके बीच के हिस्सों की मरम्मत होनी है। केन्द्र की तरफ से 5418 करोड़ की लागत से तीन बड़े सेतु का निर्माण किया जा रहा है। गंगा पर पटना में दीघा सेतु और मुंगेर सेतु का निर्माण धीमी गति से चल रहा है। 2900 करोड़ की लागत वाले दीघा रेल सह सड़क सेतु का निर्माण वर्ष 2002 में शुरू हुआ। धीमी गति से बन रहे इस महासेतु के निर्माण पूरा करने की समय सीमा 2014 तक बढ़ा दी गई है। इसके निर्माण से पटना से उत्तर बिहार की दूरी कम होगी। महात्मा गांधी सेतु का यह सबसे अच्छा विकल्प होगा। पटना प्रमंडल से सारण प्रमंडल जाना आसान हो जाएगा। वहीं 2100 करोड़ की लागत से बन रहे मुंगेर रेल सह सड़क सेतु का निर्माण वर्ष 2003 में शुरू हुआ। अब इस महासेतु के निर्माण पूरा करने की समय सीमा वर्ष 2014 कर दी गई है, पर निर्माण गति को देखते हुए यह संभव नहीं लग रहा है। इसके बन जाने से मुंगेर प्रमंडल से तिरहुत और दरभंगा प्रमंडल की लाखों आबादी को सीधा फायदा होगा। पुराने पुलों की मरम्मत भी जरूरी
वहीं क्षतिग्रस्त डुमरी सेतु से खगडिया के कुछ हिस्सों के साथ ही सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और पूर्णिया जिले की लाखों की आबादी को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।। एनएच-107 (महेशखुंट-सोनबरसा-सिमरी बख्तियारपुर-सहरसा-मधेपुरा-पूर्णिया) के अन्तर्गत कोसी नदी पर अवस्थित डुमरी पुल के ध्वस्त होने से यहां के लोगों का राजधानी पटना से सीधा सड़क संपर्क भंग है। कायाकल्प की उम्मीद
राज्य में नेशनल हाइवे को फोर लेन में तब्दील करने की मंजूरी के साथ ही कोईलवर और मोकामा में फोर लेन सेतु निर्माण की भी मंजूरी मिली है। वहीं मोकामा सेतु के क्षतिग्रस्त हो जाने से भारी गाड़ियों को बड़ी परेशानी होती है। बेगूसराय और बरौनी के औद्योगिक क्षेत्र जाने और वहां से दक्षिण बिहार आने वाली गाड़ियों को भागलपुर या पटना के गांधी सेतु से काफी लम्बी दूरी तय कर आर-पार होना पड़ता है। इन दोनों पुलों के समानान्तर फोर लेन सेतुओं के बन जाने से आम लोगों के साथ ही व्यापारियों को काफी फायदा होगा। इसके साथ ही केन्द्र गांधी सेतु के समानान्तर पटना की कच्ची दरगाह और वैशाली के विदुपुर के बीच भी फोर लेन सेतु निर्माण के लिए सर्वे करा रहा है। इसके बनने से गांधी सेतु की फजीहत से मुक्ति मिल जाएगी। दरकार ऐसे अनेक पुल की
बिहार के विकास को एक्सप्रेस हाईवे जैसी गति चाहिए तो ऐसे अनेक पुलों की दरकार है। पटना के दीघा और मुंगेर में रेल सह सड़क पुल और कोसी के भवटियाही में रेल पुल के निर्माण की मंजूरी नीतीश कुमार के रेल मंत्री कार्यकाल में मिली थी, लेकिन दस वर्षों में भी इनका निर्माण पूरा नहीं हो सका है, जबकि इन महत्वाकांक्षी पुलों के निर्माण से राज्य की गति और तेज होगी। राज्य के दो बड़े हिस्सों को जोड़ने वाले ऐसे कई सेतु अभी निर्माणाधीन हैं। साथ ही ऐसे कई सेतु अभी योजना बनने के दौर से गुजर रहे हैं, जिनका निर्माण होने के बाद यकीनन राज्य की तस्वीर बदल जाएगी। दरअसल पिछले दो दशक में सिर्फ एक बड़े विक्रमशीला सेतु का ही निर्माण हो पाया। भागलपुर में गंगा नदी पर सिर्फ यही एक पुल बना। महात्मा गांधी सेतु और मोकामा स्थित राजेन्द्र सेतु की बदहाली ने भी प्रदेशवासियों की परेशानी बढ़ा दी। एक तरफ राजेन्द्र सेतु पर बड़ी गाड़ियों का परिचालन बन्द हुआ तो गांधी सेतु पर पिछले एक दशक से चल रहे लगातार मरम्मत कार्य के कारण रोज घंटों जाम का संकट पैदा हो गया है। कोइलवर सेतु के सिंगल लेन होने का खामियाजा दक्षिण बिहार के आरा-सासाराम समेत उत्तर प्रदेश जाने वालों को रोज भुगतना पड़ रहा है। इनसे सिर्फ यात्री ही परेशान नहीं हो रहे, बल्कि राज्य का व्यापार और अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
कोसी प्रमंडल के भवटियाही में 8 फरवरी को कोसी नदी पर निर्मित 1.8 किलोमीटर और तिरहुत प्रमंडल के पिल्खी में बूढ़ी गंडक नदी पर निर्मित 280 मीटर लंबे सेतु का 7 फरवरी को उद्घाटन हुआ। ये दोनों पुल बिहार के विकास में मील के पत्थर साबित होंगे। कोसी पर पुल के निर्माण से मंडन मिश्र और महाकवि विद्यापति के दो हिस्से में आठ दशक पूर्व बंट गया राज्य का मिथिलांचल अब एक कड़ी में फिर से जुड़ गया है। दरअसल बिहार के 16 नेपाल सीमावर्ती जिलों में नेपाल से आने वाली नदियों का जाल बिछा है। इन नदियों की बाढ़ से हर साल तबाही तो होती ही है, आवागमन भी बाधित होता है। ऐसे में इन इलाकों में अनेक स्थानों पर ऊंचे और लंबे पुल की आवश्यकता है। कोसी महासेतु ने न केवल बंटे हुए मिथिलांचल को जोड़ दिया है, बल्कि बिहार से पश्चिम में गुजरात के पोरबंदर और पूरब में आसाम के सिलचर तक आवागमन को सुगम बना दिया है। मुजफ्फरपुर-पूसा रोड में पिल्खी घाट पुल पर निर्मित पुल से पटना से दरभंगा-मधुबनी और सुपौल जाने वालों को आसानी हो गई है। अब पटना से महुआ होते हुए दरभंगा की दूरी भी कम हो गई है। दरभंगा जाने वालों को मुजफ्फरपुर जाने की जरूरत नहीं रही। कई पुलों का निर्माण जारी है
नीतीश कुमार की सरकार ने रोड कनेक्टिविटी के लिए सबसे महत्वपूर्ण पुलों के निर्माण को सर्वाधिक प्राथमिकता दी है। सत्ता संभालने के तुरंत बाद से की गई पहल रंग लाने लगी है। एनडीए-1 के पांच वर्षों के दौरान सात बड़े सेतुओं की नींव पड़ी। 3954 करोड़ की लागत से प्रदेश में ये सात बड़े सेतु बन रहे हैं। गंगा नदी पर दो, कोसी पर दो, गंडक पर दो और सोन नदी पर एक बड़े सेतु का निर्माण चल रहा है। गंगा नदी पर निर्माणाधीन बड़े सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार की दूरी कम करेंगे। चार सेतु उत्तर बिहार की दिशा-दशा बदलेंगे तो एक दक्षिण बिहार की भौगोलिक दूरी कम करेगा। गंगा नदी पर बख्तियारपुर-ताजपुर और आरा-छपरा के बीच सेतु निर्माणाधीन है। साढ़े पांच किलोमीटर लम्बे बख्तियारपुर-ताजपुर महासेतु के बनने से पटना से समस्तीपुर, दरभंगा, बेगूसराय, मधुबनी समेत उत्तर बिहार के कई जिलों की दूरी में 30 से लेकर 50 कि.मी. की कमी होगी। नालन्दा, गया, बिहारशरीफ, नवादा और झारखंड के हजारीबाग, रांची आदि मुख्य शहरों से उत्तर बिहार की तरफ जाने वाली गाड़ियों को महात्मा गांधी सेतु से गुजरने की जरुरत नहीं होगी। इन जगहों की गाड़ियां बख्तियारपुर-पटोरी महासेतु पार कर उत्तर बिहार पहुंच जाएंगी। गंगा नदी पर ही आरा के बबुरा और छपरा के डोरीगंज के बीच एक अन्य महासेतु का निर्माण जारी है। इसके निर्माण से महात्मा गांधी सेतु पर गाड़ियों का दबाव कम होगा। वहीं आरा, रोहतास, कैमूर, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद आदि जिलों से छपरा, सीवान और गोपालगंज होते हुए उत्तर प्रदेश की दूरी कम हो जाएगी। कोसी नदी पर सहरसा में बलुआहा घाट और नवगछिया में विजय घाट में सेतु बन रहा है। कोशी-पूर्णिया प्रमंडल के बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में दो बड़े सेतु बन रहे हैं। भागलपुर से मधेपुरा, सहरसा और सुपौल जिले का आवागमन आसान करने वाले विजय घाट महासेतु से मधेपुरा जिला के भटगांव से भागलपुर के नवगछिया तक पुल का विस्तार होगा। चार लेन वाले इस सेतु के बनने से भागलपुर प्रमंडल से कोसी की दूरी काफी कम हो जाएगी। भागलपुर से मधेपुरा की दूरी 51 कि.मी., सहरसा की 25 कि.मी. और सुपौल की दूरी 25 कि.मी. छोटी होगी। कोसी पर सहरसा में बलुआहा घाट पुल का निर्माण हो जाने से करीब हर वर्ष बाढ़ का सामना करने वाले लाखों की आबादी को बड़ी राहत मिलेगी। सहरसा-सुपौल की भी दूरी भी कम हो जाएगी। गंडक नदी पर पर बगहा में रतवल घाट और गोपालगंज के विशुनपुर में सेतु निर्माण चालू है। रतवल घाट पुल से पश्चिम चम्पारण के वन क्षेत्र से मैदानी क्षेत्र में आने का रास्ता सुगम हो जाएगा। वहीं गोपालगंज के विशुनपुर में बन रहे सेतु से उत्तर प्रदेश और बिहार के सीवान और गोपालगंज से मोतिहारी-बेतिया की दूरी 50 से 100 कि.मी. कम हो जाएगी। सोन नदी पर अरवल-सहार के बीच सेतु का निर्माण तेजी से चल रहा है। इससे भोजपुर और रोहतास से अवरल, जहानाबाद, गया और औरंगाबाद की दूरी कम हो जाएगी। इसके अतिरिक्त बागमती नदी पर पिपराही और मांडर, बुढ़ी गंडक नदी पर रंगही और चकिया-गोविन्द-मधुबन पथ पर तथा सिकहरना नदी पर जटवा घाट में करोड़ों की लागत से पुल का निर्माण जारी है। केंद्र प्रायोजित पुल निर्माण
केन्द्र सरकार दो महासेतु का निर्माण करा रही है। तीन नए फोर लेन सेतु का निर्माण करने को तैयार है। मनिहारी-साहेबगंज के बीच गंगा नदी पर एक और सेतु बनाने की मंजूरी दी गई है। इससे बिहार और झारखंड दोनों राज्यों को फायदा होगा। इसके अतिरिक्त क्षतिग्रस्त डुमरी सेतु के पुनर्स्थापन की भी हरी झंडी मिली है। 50 करोड़ की लागत से सेतु के चार क्षतिग्रस्त पायों और उनके बीच के हिस्सों की मरम्मत होनी है। केन्द्र की तरफ से 5418 करोड़ की लागत से तीन बड़े सेतु का निर्माण किया जा रहा है। गंगा पर पटना में दीघा सेतु और मुंगेर सेतु का निर्माण धीमी गति से चल रहा है। 2900 करोड़ की लागत वाले दीघा रेल सह सड़क सेतु का निर्माण वर्ष 2002 में शुरू हुआ। धीमी गति से बन रहे इस महासेतु के निर्माण पूरा करने की समय सीमा 2014 तक बढ़ा दी गई है। इसके निर्माण से पटना से उत्तर बिहार की दूरी कम होगी। महात्मा गांधी सेतु का यह सबसे अच्छा विकल्प होगा। पटना प्रमंडल से सारण प्रमंडल जाना आसान हो जाएगा। वहीं 2100 करोड़ की लागत से बन रहे मुंगेर रेल सह सड़क सेतु का निर्माण वर्ष 2003 में शुरू हुआ। अब इस महासेतु के निर्माण पूरा करने की समय सीमा वर्ष 2014 कर दी गई है, पर निर्माण गति को देखते हुए यह संभव नहीं लग रहा है। इसके बन जाने से मुंगेर प्रमंडल से तिरहुत और दरभंगा प्रमंडल की लाखों आबादी को सीधा फायदा होगा। पुराने पुलों की मरम्मत भी जरूरी
वहीं क्षतिग्रस्त डुमरी सेतु से खगडिया के कुछ हिस्सों के साथ ही सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और पूर्णिया जिले की लाखों की आबादी को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।। एनएच-107 (महेशखुंट-सोनबरसा-सिमरी बख्तियारपुर-सहरसा-मधेपुरा-पूर्णिया) के अन्तर्गत कोसी नदी पर अवस्थित डुमरी पुल के ध्वस्त होने से यहां के लोगों का राजधानी पटना से सीधा सड़क संपर्क भंग है। कायाकल्प की उम्मीद
राज्य में नेशनल हाइवे को फोर लेन में तब्दील करने की मंजूरी के साथ ही कोईलवर और मोकामा में फोर लेन सेतु निर्माण की भी मंजूरी मिली है। वहीं मोकामा सेतु के क्षतिग्रस्त हो जाने से भारी गाड़ियों को बड़ी परेशानी होती है। बेगूसराय और बरौनी के औद्योगिक क्षेत्र जाने और वहां से दक्षिण बिहार आने वाली गाड़ियों को भागलपुर या पटना के गांधी सेतु से काफी लम्बी दूरी तय कर आर-पार होना पड़ता है। इन दोनों पुलों के समानान्तर फोर लेन सेतुओं के बन जाने से आम लोगों के साथ ही व्यापारियों को काफी फायदा होगा। इसके साथ ही केन्द्र गांधी सेतु के समानान्तर पटना की कच्ची दरगाह और वैशाली के विदुपुर के बीच भी फोर लेन सेतु निर्माण के लिए सर्वे करा रहा है। इसके बनने से गांधी सेतु की फजीहत से मुक्ति मिल जाएगी। दरकार ऐसे अनेक पुल की
बिहार के विकास को एक्सप्रेस हाईवे जैसी गति चाहिए तो ऐसे अनेक पुलों की दरकार है। पटना के दीघा और मुंगेर में रेल सह सड़क पुल और कोसी के भवटियाही में रेल पुल के निर्माण की मंजूरी नीतीश कुमार के रेल मंत्री कार्यकाल में मिली थी, लेकिन दस वर्षों में भी इनका निर्माण पूरा नहीं हो सका है, जबकि इन महत्वाकांक्षी पुलों के निर्माण से राज्य की गति और तेज होगी। राज्य के दो बड़े हिस्सों को जोड़ने वाले ऐसे कई सेतु अभी निर्माणाधीन हैं। साथ ही ऐसे कई सेतु अभी योजना बनने के दौर से गुजर रहे हैं, जिनका निर्माण होने के बाद यकीनन राज्य की तस्वीर बदल जाएगी। दरअसल पिछले दो दशक में सिर्फ एक बड़े विक्रमशीला सेतु का ही निर्माण हो पाया। भागलपुर में गंगा नदी पर सिर्फ यही एक पुल बना। महात्मा गांधी सेतु और मोकामा स्थित राजेन्द्र सेतु की बदहाली ने भी प्रदेशवासियों की परेशानी बढ़ा दी। एक तरफ राजेन्द्र सेतु पर बड़ी गाड़ियों का परिचालन बन्द हुआ तो गांधी सेतु पर पिछले एक दशक से चल रहे लगातार मरम्मत कार्य के कारण रोज घंटों जाम का संकट पैदा हो गया है। कोइलवर सेतु के सिंगल लेन होने का खामियाजा दक्षिण बिहार के आरा-सासाराम समेत उत्तर प्रदेश जाने वालों को रोज भुगतना पड़ रहा है। इनसे सिर्फ यात्री ही परेशान नहीं हो रहे, बल्कि राज्य का व्यापार और अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
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